राहुल गांधी ने आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की मांग की

राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार उनके शांतिपूर्ण विरोध को पुलिस बल के माध्यम से दबा रही है। गांधी ने कहा कि आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन पर पहला हक है और उनकी मांग है कि उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास मिले। इस मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की है।
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मध्यप्रदेश में आदिवासियों का विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली, 27 जुलाई: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि पुलिस बल के माध्यम से शांतिपूर्ण विरोध को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार 'सत्य और सत्याग्रह' से भयभीत है। गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश के आदिवासी जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर बैठे हैं, क्योंकि उनकी जमीन केन-बेतवा परियोजना के लिए छीन ली गई है, लेकिन उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास।


कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासी इस देश के 'पहले मालिक' हैं और जल, जंगल और जमीन पर उनका पहला हक है। उन्होंने बताया कि आदिवासियों का सत्याग्रह इसलिए है, क्योंकि उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासियों की केवल यह मांग है कि उन्हें जीवन यापन के लिए उचित सहायता प्रदान की जाए।


उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उनके शांतिपूर्ण विरोध को भी पुलिस बल के जरिए कुचल रही है। उन्होंने कहा, 'हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ खड़े हैं। उन्हें न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है—मुआवजा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।'