राहुल गांधी ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर केंद्र सरकार पर किया हमला
राहुल गांधी ने NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत और सपने सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण बर्बाद हो गए हैं। उन्होंने इस स्थिति को छात्रों के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि ईमानदार छात्रों को इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। गांधी ने पुनर्परीक्षा प्रक्रिया के कारण होने वाले तनाव और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
| May 12, 2026, 16:11 IST
राहुल गांधी का बयान
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने के बाद भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत, बलिदान और सपने सरकारी लापरवाही और शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण बर्बाद हो गए हैं। यह प्रतिक्रिया तब आई जब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 3 मई को NEET (UG) 2026 परीक्षा को पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के चलते रद्द करने की घोषणा की।
सरकार ने इस मामले की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जिम्मेदारी सौंपी है। राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के रद्द होने से देशभर के छात्रों और उनके परिवारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि 22 लाख से अधिक छात्रों की मेहनत और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपा सरकार ने नष्ट कर दिया है। कांग्रेस नेता ने इस कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और भावनात्मक दबाव को उजागर किया।
गांधी ने कहा कि कई पिताओं ने कर्ज लिया, माताओं ने अपने गहने बेचे, और लाखों बच्चे रात-रात भर पढ़ाई करते रहे, लेकिन उन्हें पेपर लीक, सरकारी उपेक्षा और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे छात्रों के साथ विश्वासघात करार दिया और कहा कि यह केवल एक विफलता नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य के खिलाफ एक अपराध है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ईमानदार छात्र पीड़ित हो रहे हैं, जबकि पेपर लीक करने वाले लोग बच निकलते हैं।
उन्होंने कहा कि हर बार पेपर माफिया बिना सजा के बच जाता है, जबकि ईमानदार छात्रों को इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने पुनर्परीक्षा प्रक्रिया के कारण उम्मीदवारों को होने वाले तनाव की ओर भी ध्यान दिलाया। गांधी ने कहा कि अब लाखों छात्रों को फिर से मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी का भाग्य मेहनत से नहीं, बल्कि पैसे और जान-पहचान से तय होता है, तो शिक्षा का क्या मूल्य रह जाता है?
