राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई और ईडी को निर्देश दिया है। कोर्ट ने इन एजेंसियों से आठ हफ्तों में जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और उनके परिवार ने अपनी घोषित आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी।
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राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच का आदेश gyanhigyan

इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई और ईडी को निर्देशित किया है। कोर्ट ने इन दोनों एजेंसियों से आठ हफ्तों के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने कर्नाटक बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर जारी किया।


आरोपों की गंभीरता

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि राहुल गांधी और उनके परिवार ने अपनी घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट किया कि वह आरोपों की सत्यता पर अभी कोई राय नहीं रखती। बेंच ने कहा कि मामला प्रारंभिक चरण में है और सीबीआई तथा ईडी ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और वे अपना जवाब दाखिल करेंगे।


याचिकाकर्ता की मांगें

कोर्ट ने कहा कि शिकायत मिलने पर कानून के अनुसार जांच होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने DOP&T, वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और SFIO को भी मामले में पक्षकार बनाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। सभी संबंधित पक्षों को आठ हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।


कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने सचिव कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, याचिका में इसका उल्लेख नहीं था, लेकिन याचिकाकर्ता ने बताया कि यह मंत्रालय भी एक आवश्यक पक्षकार है। कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया।


अगली सुनवाई की तारीख

सीबीआई और ईडी ने बेंच को बताया कि उन्हें याचिकाकर्ता की शिकायत मिल गई है और वे कोर्ट में अपना जवाब पेश करेंगे। बेंच ने कहा कि याचिका विचारणीय है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित पक्षों के हलफनामे के बाद किया जाएगा। कोर्ट ने अपने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को एक सीलबंद लिफाफे में रखा जाए, जिसे अगली सुनवाई पर खोला जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी।