राष्ट्रीय लोक अदालत 2025: 13 सितंबर को निपटाए जाने वाले प्रमुख विवाद

राष्ट्रीय लोक अदालत 2025 का आयोजन
राष्ट्रीय लोक अदालत 2025: 2025 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार, 13 सितंबर को आयोजित की जाएगी। यह तिथि पूरे देश में समान है। लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा किया जाएगा, जिनमें आपराधिक समझौता योग्य अपराध, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (धारा 138) के तहत मामले, बैंक वसूली मामले, मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल के मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली और पानी के बिल (गैर-समझौता योग्य चोरी के मामलों को छोड़कर), वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित सेवा मामले, राजस्व मामले और अन्य नागरिक मामले जैसे किराए के विवाद शामिल हैं।
लोक अदालत का उद्देश्य
लोक अदालत का आयोजन जनता को कई कानूनी मामलों में राहत प्रदान करने के लिए किया जाता है। चूंकि यह आम जनता के लिए है, इसे जन अदालत भी कहा जाता है। इस मंच पर, आप आपसी सहमति से लंबित कानूनी विवादों का निपटारा कर सकते हैं। इसके साथ ही, यहां ट्रैफिक चालान की राशि को भी कम किया जा सकता है। इसके अलावा, पारिवारिक मामलों जैसे संपत्ति अधिग्रहण, वित्तीय विवाद और वैवाहिक मुद्दों का निपटारा भी लोक अदालत में किया जाएगा।
लोक अदालत का आयोजन जिला अदालत, सभी तालुका स्तर की अदालतों, श्रम और औद्योगिक अदालतों, पारिवारिक अदालतों, उपभोक्ता फोरम और अन्य न्यायालयों में किया जाता है। नागरिकों को राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने मामलों को रखने के लिए संबंधित अदालतों में लंबित मामलों के लिए आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
लोक अदालत 2025: 5 प्रमुख विवाद जिन्हें आप निपटा सकते हैं
ट्रैफिक चालान: वाहन मालिक आगामी लोक अदालत में अपने लंबित ट्रैफिक चालान का निपटारा कर सकते हैं। यह राष्ट्रीय राजधानी में सभी वाहन मालिकों को इन जुर्मानों को निपटाने या माफ कराने का एक मंच प्रदान करेगा।
भूमि अधिग्रहण मामले: लोक अदालत भूमि अधिग्रहण से संबंधित विवादों को सुलझाने का एक मंच प्रदान करती है, जो ऐसे विवादों को निपटाने का एक प्रभावी तरीका है।
श्रम विवाद: लोक अदालत श्रम से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए एक मंच प्रदान करती है। यह पक्षों को कार्यस्थल के मुद्दों को प्रभावी और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने में सक्षम बनाती है। श्रमिकों के मुआवजे के मामले: श्रमिकों के मुआवजे के विवाद भी लोक अदालत के माध्यम से हल किए जा सकते हैं, जो श्रमिकों के मुआवजे के दावों के लिए एक आपसी सहमति का समाधान प्रदान करता है।
बैंक वसूली मामले: लोक अदालत बैंक वसूली से संबंधित विवादों को सुलझाने का भी एक मंच प्रदान करती है, जिससे पक्षों को ऋण और कर्ज से संबंधित मुद्दों को सुलझाने की अनुमति मिलती है।