राष्ट्रपति मुर्मू ने बुनकरों को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से किया सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के दो बुनकरों को कानी बुनाई में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार नई दिल्ली में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रदान किया गया। कानी बुनाई एक प्राचीन कश्मीरी कला है, जिसमें बुनकर रंग-बिरंगे धागों से अद्भुत डिज़ाइन बनाते हैं। जानें इस कला और पुरस्कार के बारे में और अधिक जानकारी।
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बुनाई की कला का सम्मान

श्रीनगर, आठ अगस्त: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के दो बुनकरों को ‘कानी बुनाई’ के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से नवाजा। कानी बुनाई कश्मीर की एक प्राचीन और अत्यंत बारीक हथकरघा कला है, जिसमें कारीगर ‘कानी’ नामक छोटी लकड़ी की नलियों का उपयोग करके रंग-बिरंगे धागों को कपड़े में गूंथते हैं, जिससे दोनों तरफ से दिखाई देने वाले फूलों और बूटेदार डिज़ाइन बनते हैं।


यह अद्भुत कला मध्य कश्मीर के कनिहामा गांव से उत्पन्न हुई थी। इस बुनाई के उत्पाद को तैयार करने में छह महीने से लेकर कई वर्षों तक का समय लग सकता है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, कनिहामा के मास्टर बुनकरों - मंजूर अहमद हजाम और फयाज अहमद वानी को उनकी संयुक्त प्रविष्टि ‘चांद-दार कानी शॉल’ के लिए यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किया गया।


राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में इन पुरस्कारों का वितरण किया।