राष्ट्रपति मुर्मू की ऐतिहासिक उड़ान: भारत की सामरिक शक्ति का प्रतीक
राष्ट्रपति की उड़ान का महत्व
पाकिस्तान की सीमा के निकट आसमान में गूंजती गड़गड़ाहट के बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जब उड़ान भरी, तो यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत की सर्वोच्च सेनानायक निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक हैं। राजस्थान के जैसलमेर में दुश्मन की चौकसी को भांपते हुए, जब राष्ट्रपति ने लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड के कॉकपिट से हाथ हिलाया, तो यह दृश्य भारत की सामरिक इच्छाशक्ति का उद्घोष बन गया।
उड़ान का विवरण
राष्ट्रपति ने जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन से उड़ान भरी। कैप्टन से विस्तृत ब्रीफिंग के बाद, जब हेलिकॉप्टर ने रनवे छोड़ा, तो यह घटना सैन्य अनुशासन और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का संगम बन गई। लगभग पच्चीस मिनट की इस उड़ान में दो प्रचंड हेलिकॉप्टरों की फॉर्मेशन शामिल थी। राष्ट्रपति लीड एयरक्राफ्ट में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ थीं, जबकि दूसरे हेलिकॉप्टर को वायुसेना प्रमुख उड़ा रहे थे.
सामरिक तैयारी का प्रदर्शन
उड़ान के दौरान, हेलिकॉप्टर ने गडीसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से गुजरते हुए निर्धारित टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन किया। यह केवल एक अभ्यास नहीं था, बल्कि यह स्पष्ट संकेत था कि भारत की सामरिक तैयारी हर सीमा पर सतर्क है.
प्रचंड हेलिकॉप्टर की विशेषताएँ
लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी डिजाइन और विकसित अटैक हेलिकॉप्टर है, जिसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है। इसकी मारक क्षमता दुश्मन के लिए सीधी चुनौती है। राष्ट्रपति ने कॉकपिट से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रचंड आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है.
सैन्य मनोबल को बढ़ाने वाला कदम
पाक सीमा के निकट इस उड़ान का समय और स्थान दोनों ही गहरे सामरिक अर्थ रखते हैं। जैसलमेर सेक्टर पश्चिमी मोर्चे का संवेदनशील इलाका है। ऐसे क्षेत्र में सर्वोच्च सेनानायक की मौजूदगी सैनिकों के मनोबल को कई गुना बढ़ाती है और विरोधी ताकतों को स्पष्ट संदेश देती है कि भारत नेतृत्व और तैयारी दोनों में अग्रिम पंक्ति में खड़ा है.
राष्ट्रपति की सैन्य भागीदारी
यह उड़ान पोखरण फायरिंग रेंज के ऊपर से हुई, जहां वायुसेना का फायरपावर प्रदर्शन आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य शक्ति के बीच पूर्ण सामंजस्य है.
अन्य उड़ानों का अनुभव
इससे पहले, राष्ट्रपति ने अंबाला एयर फोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी थी और तेजपुर में सुखोई-30 एमकेआई में भी सवारी की थी। वह दो अलग-अलग फाइटर प्लेटफॉर्म पर उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं.
पनडुब्बी में अनुभव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समुद्र की गहराइयों में भी भारत की सामरिक शक्ति का अनुभव कर चुकी हैं। पिछले साल कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे से उन्होंने स्वदेशी पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर डाइव्ड सॉर्टी की थी.
नए भारत का प्रतीक
राष्ट्रपति का यह कदम परंपरागत सीमाओं को तोड़ता है। यह साहसिक फैसला उस नए भारत का प्रतीक है जो आत्मनिर्भर और आक्रामक आत्मविश्वास से भरा है. राष्ट्रपति के इस निर्भीक कदम के लिए राष्ट्र उन्हें सलाम करता है.
