रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का संकट: 100 डॉक्टरों का इस्तीफा
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर संकट
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय और दाऊ कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से पिछले दो वर्षों में लगभग 100 चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया है। इस सामूहिक पलायन के कारण मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में भारी कमी आई है।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकांश डॉक्टर संविदा पर कार्यरत थे, जिन्हें लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद स्थायी नहीं किया गया। प्रमोशन की कमी, निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध की चर्चा, बेहतर सुविधाओं का अभाव और अन्य राज्यों में उपलब्ध बेहतर अवसरों के कारण डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ रहे हैं। कई चिकित्सक निजी अस्पतालों या अन्य राज्यों में जा रहे हैं, जहां उन्हें अधिक वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियां मिल रही हैं।
इस स्थिति का असर आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस के कई विभागों पर पड़ा है। न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, और कार्डियोलॉजी जैसे सुपर स्पेशलिटी विभागों में विशेषज्ञों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को परेशानी हो रही है। प्रदेश में स्वीकृत डॉक्टरों के पदों में से सैकड़ों खाली पड़े हैं, जिससे सामान्य ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मानते हैं कि डॉक्टरों का पलायन रोकना अब एक चुनौती बन गया है। भारतीय चिकित्सा संघ ने भी सरकार से नीतियों पर पुनर्विचार करने की अपील की है, ताकि सरकारी डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस की कुछ छूट मिल सके और खाली पदों को जल्द भरा जा सके।
मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च बहुत अधिक है। यह स्थिति न केवल रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य ढांचे के लिए चिंता का विषय बन गई है। सरकार से मांग की जा रही है कि जल्द से जल्द डॉक्टरों की भर्ती की जाए और मौजूदा स्टाफ की समस्याओं का समाधान किया जाए, अन्यथा मरीजों की परेशानियां और बढ़ेंगी।
