रात का बचा खाना खाने से युवक की जान पर बन आई

एक युवक ने रात का बचा हुआ खाना खाने के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया। उसकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया और उसे सेप्सिस हो गया, जिसके कारण उसे अपनी उंगलियां और दोनों पैर कटवाने पड़े। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि ताजा और सुरक्षित भोजन का सेवन कितना महत्वपूर्ण है। जानें सेप्सिस के लक्षण और इससे बचने के उपाय।
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रात का बचा खाना खाने से युवक की जान पर बन आई gyanhigyan

स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक

आजकल अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो गया है। इसके लिए हमें समय पर और ताजा खाना खाना चाहिए। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसा करना मुश्किल हो जाता है। अक्सर हम रात का बचा हुआ खाना फ्रिज में रखकर अगले दिन खा लेते हैं। यह आदत भले ही सामान्य लगती हो, लेकिन यह जानलेवा साबित हो सकती है।


खाने के कारण हुई गंभीर समस्या

एक युवक, जो इंग्लैंड में रहता है, को रात का बचा खाना खाने के कारण अपनी उंगलियों और दोनों पैरों को कटवाना पड़ा। उसकी जान तो बच गई, लेकिन वह जीवनभर के लिए अपंग हो गया।


होटल से लाया गया खाना

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, जेसी नामक युवक ने फ्रिज में रखा खाना खाया था, जो उसके दोस्त ने होटल से लाया था। इस खाने में नूडल्स और चिकन शामिल थे।


अस्पताल में भर्ती

जेसी ने खाना फ्रिज में रखने के बाद सो गया। सुबह उठने पर उसने वही खाना नाश्ते में खा लिया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे तेज बुखार हुआ और जब हालत गंभीर हो गई, तो उसे अस्पताल ले जाया गया।


किडनी की समस्या

अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उसकी त्वचा बैंगनी पड़ गई थी और किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। इससे उसके शरीर में जहर फैलने लगा। रिपोर्ट में बैक्टीरिया की मौजूदगी से पता चला कि उसे सेप्सिस हो गया था।


उंगलियों और पैरों का कटना

बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण डॉक्टरों को उसकी उंगलियां काटनी पड़ीं। इसके बाद, दोनों पैरों को भी घुटने के नीचे से काटना पड़ा। वह कोमा में चला गया और 26 दिन बाद होश आया, लेकिन वह अपंग हो चुका था।


सेप्सिस के बारे में जानकारी

सेप्सिस एक गंभीर स्थिति है जो बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होती है। जब शरीर किसी संक्रमण का शिकार होता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया करती है। लेकिन जब यह प्रतिक्रिया बेकाबू हो जाती है, तो सेप्सिस का खतरा बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई और तेज हार्ट बीट शामिल हैं।