राज्यसभा में राघव चड्ढा का कटाक्ष, हरिवंश बने उपसभापति

राज्यसभा में सांसद राघव चड्ढा ने अपनी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कई नेता सदन में उपस्थित नहीं हैं। इस बीच, हरिवंश को तीसरी बार उपसभापति निर्विरोध चुना गया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और चड्ढा के बयान का क्या मतलब है।
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राज्यसभा में राघव चड्ढा का बयान

शुक्रवार को सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में बोलते समय अपनी पार्टी पर कटाक्ष किया, जिसका हाल ही में उनके साथ मतभेद हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेता सदन में मौजूद नहीं हैं, जो स्पष्ट रूप से AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह की ओर इशारा था। इसके साथ ही, चड्ढा ने यह भी कहा कि उनके पार्टी के नए उपनेता भी सदन में नहीं हैं, जिसका संकेत अशोक कुमार मित्तल की ओर था, जो चड्ढा की तरह पंजाब से सांसद हैं।


हरिवंश का उपसभापति के रूप में चुनाव

चड्ढा ने 17 अप्रैल को संसद के उच्च सदन के उपसभापति के रूप में तीसरी बार निर्विरोध चुने जाने पर हरिवंश नारायण सिंह को बधाई देते हुए कहा कि वह हाल ही में हटाए गए उपनेता हैं और सदन में उपस्थित हैं। हरिवंश को शुक्रवार को राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुना गया। यह उनके लिए उपसभापति के रूप में तीसरा कार्यकाल है।


हरिवंश के निर्वाचन की प्रक्रिया

हरिवंश के निर्वाचन के लिए केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने प्रस्ताव पेश किया, जिसे एस फांग्नोन कोन्याक ने समर्थन दिया। प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया गया, जिसके बाद हरिवंश को तीसरी बार उपसभापति चुना गया। सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने घोषणा की कि हरिवंश जी राज्यसभा के उपसभापति चुने गए हैं।


हरिवंश को उपसभापति की सीट तक ले जाना

इसके बाद, सभापति ने सदन के नेता नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से अनुरोध किया कि वे हरिवंश को उपसभापति की निर्धारित सीट तक ले जाएं। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हरिवंश को उनकी सीट तक पहुंचाया। यह सीट विपक्ष के नेता की सीट के निकट है। हरिवंश का उपसभापति का पद नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद रिक्त हो गया था।