राज्यसभा में एमएसएमई विधेयक पर चर्चा: बेरोजगारी दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका
एमएसएमई क्षेत्र का महत्व
नई दिल्ली, 3 अगस्त: देश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोमवार को राज्यसभा में सदस्यों ने इस क्षेत्र की बेरोजगारी कम करने में भूमिका पर चर्चा की। भाजपा की सुमित्रा वाल्मीक ने कहा कि यह विधेयक वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए लाया गया है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह विधेयक उनके लिए अत्यंत लाभकारी है।
लघु उद्योगों का विकास
वाल्मीक ने बताया कि छोटी बचतों के माध्यम से लघु उद्योगों का विकास हो रहा है। उन्होंने लखपति दीदी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल रोजगार प्रदान करना नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
विधेयक का परिचय
यह विधेयक 28 जुलाई को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम माझी द्वारा पेश किया गया था। तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने कहा कि एमएसएमई की मदद से बेरोजगारी को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।
चुनौतियों का सामना
बीजद के डॉ संतृप्त मिश्रा ने कहा कि जीडीपी में एमएसएमई का योगदान 35 प्रतिशत है, लेकिन इसके लिए चुनौतियाँ भी हैं। उन्होंने बताया कि मूल विधेयक 2006 में आया था और अब इसका संशोधन किया जा रहा है।
नए नियमों की आवश्यकता
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोल्लाबाबू राव ने विधेयक में नए नियमों की सराहना की, जो मध्यस्थता और फैसलों के त्वरित निपटारे के लिए हैं। अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरै ने एमएसएमई के विकास के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की।
विधेयक का समर्थन
राकांपा के राजेंद्र हीरालाल जैन ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह एमएसएमई को सशक्त बनाएगा। उन्होंने चावल उत्पादन क्षेत्र में बिजली की दरें घटाने की मांग की। तेदेपा के मस्तान राव यादव ने भी विधेयक में संशोधनों का समर्थन किया।
बच्चों की शिक्षा पर ध्यान
बसपा के रामजी ने विधेयक में उन बच्चों का उल्लेख नहीं होने पर चिंता जताई जो एमएसएमई क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें स्कूल जाना चाहिए।
