राज्य वित्त आयोग की बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति पर चर्चा

राज्य वित्त आयोग की बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की गई। आयोग ने विभिन्न सुझावों को सुना, जिसमें नगरीय विकास कर की वसूली और संसाधनों को सुदृढ़ करने के उपाय शामिल थे। बैठक में भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार अधिक वित्तीय प्रावधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। जानें इस महत्वपूर्ण संवाद में क्या-क्या सुझाव दिए गए और आयोग की आगामी योजनाएं क्या हैं।
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स्वायत्त शासन विभाग में संवाद कार्यक्रम


जयपुर। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट 4 फरवरी, 2026 को विधानसभा में पेश की थी। इसके बाद, आयोग ने विभिन्न संभागों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव लिए गए हैं, ताकि भविष्य की अनुशंसाओं को और प्रभावी बनाया जा सके।


बुधवार को स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन, निदेशक प्रतीक चन्द्रशेखर, और राज्य वित्त आयोग के सचिव नरेश ठकराल ने नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ एक सार्थक संवाद किया। इस बैठक में नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति, संसाधनों को सुदृढ़ करने और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।


आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार स्थानीय निकायों को मिलने वाले संसाधन वर्तमान आवश्यकताओं के मुकाबले अपर्याप्त हैं। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) सहित विभिन्न करों की वसूली के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे राजस्व संग्रहण में वृद्धि हो सके और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हों।


उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य नगरीय संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट निर्धारण, भवनों के अद्यतन डाटा की उपलब्धता, पर्याप्त मानव संसाधन और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुधारों से स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता और वित्तीय सुदृढ़ता में सुधार होगा।


अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2047 तक प्रदेश और देश में नगरीकरण की गति तेज होने की संभावना है, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस संदर्भ में यह सुझाव भी दिया गया कि नगरीय निकायों के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार अधिक वित्तीय प्रावधान किए जाएं।


उन्होंने कहा कि आयोग सभी सुझावों और तथ्यों का समग्र परीक्षण कर एक विस्तृत और संतुलित रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे राज्यपाल के माध्यम से राज्य सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। यह रिपोर्ट स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.