राजौरी की भैरव यात्रा को मिली राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत की मान्यता
भैरव यात्रा की ऐतिहासिक मान्यता
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। यहाँ की प्रसिद्ध भैरव यात्रा को अब भारत की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है। इस सम्मान पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राजौरी प्रशासन और जम्मू-कश्मीर के संस्कृति विभाग को उनकी मेहनत के लिए बधाई दी और इसे गर्व का क्षण बताया।
राजौरी की भैरव यात्रा एक प्राचीन परंपरा है, जो हर साल होली के त्योहार से पहले जिले के मुख्य बाजारों में भव्य शोभायात्रा के रूप में मनाई जाती है। यह उत्सव भगवान काल भैरव को समर्पित है और क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इसे राजौरी के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह मान्यता क्षेत्र की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और उत्सव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इसे उन पीढ़ियों के श्रद्धालुओं के समर्पण का सम्मान बताया जिन्होंने इस परंपरा को जीवित रखा है।
उपराज्यपाल के अनुसार, इस सूची में शामिल होने से राजौरी की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और भी मजबूत होगी। इससे न केवल शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर खुलेंगे, बल्कि क्षेत्र में विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
