राजस्थान विधानसभा में बंदरों के आतंक पर 22 मिनट की चर्चा

राजस्थान विधानसभा में सोमवार को बंदरों के बढ़ते आतंक पर 22 मिनट तक चर्चा हुई। विधायक मनीष यादव ने बताया कि 2025 में शाहपुरा क्षेत्र में 4200 लोगों को रेबीज के टीके लगे, जिनमें से अधिकांश मामले बंदरों के काटने से जुड़े थे। इस समस्या के कारण कई परिवार पलायन कर चुके हैं और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। स्वायत्त शासन मंत्री और वन मंत्री ने समस्या की गंभीरता को स्वीकार किया और समाधान के लिए सुझाव मांगे।
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राजस्थान विधानसभा में बंदरों के आतंक पर 22 मिनट की चर्चा

बंदरों की समस्या पर विस्तृत चर्चा

सोमवार को राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान बंदरों के बढ़ते आतंक पर 22 मिनट तक चर्चा हुई, जो सामान्यतः 15 मिनट में समाप्त होती है। इस दौरान सदन में हंगामा, टोका-टाकी और स्पीकर की फटकार भी देखने को मिली।


मनीष यादव, जो शाहपुरा से कांग्रेस विधायक हैं, ने अपने क्षेत्र और पूरे राज्य में बंदरों की समस्या को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। उन्होंने बताया कि 2025 में शाहपुरा क्षेत्र में लगभग 4200 लोगों को रेबीज के टीके लगाए गए, जिनमें से 90 प्रतिशत मामले बंदरों के काटने से संबंधित थे। कई परिवार इस समस्या के कारण पलायन कर चुके हैं, फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, और कुछ मामलों में स्थायी शारीरिक क्षति भी हुई है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं।


चर्चा के दौरान सदन में पहले बीकानेर में बालिका हत्या मामले पर हंगामा हुआ। कांग्रेस के विधायकों ने वॉकआउट की तैयारी में सदन से बाहर जाने का प्रयास किया। इसी समय स्पीकर वासुदेव देवनानी ने मनीष यादव का नाम पुकारा। यादव थोड़ी देर के लिए ऊहापोह में पड़ गए, लेकिन फिर लौटकर अपनी बात पूरी की।


इस पर स्पीकर देवनानी नाराज हो गए और उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा, "ऐसे मंत्री जवाब नहीं देंगे। आपका ही प्रस्ताव है और आप बाहर जा रहे हैं। मैंने नाम पुकारा और आप चले गए, ऐसे जवाब नहीं आता। आप दोनों काम एक साथ करना चाह रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं करूंगा।" स्पीकर ने उन्हें चेतावनी भी दी।


स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा और वन मंत्री संजय शर्मा ने इस समस्या की गंभीरता को स्वीकार किया। मंत्री खर्रा ने बताया कि जंगलों में मानवीय दखल बढ़ने और भोजन की कमी के कारण बंदर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। उन्होंने विधायकों से सुझाव मांगे और आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर शीघ्र व्यापक योजना बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।