राजस्थान में स्वच्छता के लिए नई पहल: लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण
राजस्थान सरकार की स्वच्छता पहल
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में, राज्य सरकार ने प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, पर्यावरण के अनुकूल और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। इस दिशा में, 152 नगरीय निकायों में लगभग 75 लाख घन मीटर लिगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 310 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना लागू की जा रही है।
यह परियोजना ‘जीरो डंपसाइट’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अंतर्गत पुराने कचरे के निस्तारण के साथ-साथ आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे भविष्य में नए डंपिंग ग्राउंड बनने की संभावना कम होगी और अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
152 नगरीय निकायों में कार्यान्वयन-
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, अब तक 30 नगरीय निकायों में 24 लाख घन मीटर से अधिक लिगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि 40 नगरीय निकायों में 35 लाख घन मीटर से अधिक कार्यों के लिए एलओए जारी किया गया है। इसके अलावा, 82 नगरीय निकायों में लगभग 16 लाख घन मीटर से अधिक कचरे के निस्तारण के लिए निविदाएं प्राप्त की गई हैं और तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया चल रही है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लक्ष्यों को मिलेगा बल-
केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत ‘जीरो डंपसाइट’ का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए डंपसाइट रेमिडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से देशभर में पुराने कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण तेजी से किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, राजस्थान में नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक लगभग 24 लाख घन मीटर लिगेसी वेस्ट का रेमिडिएशन किया गया है।
इस प्रक्रिया में पुराने कचरे को बायोमाइनिंग तकनीक के माध्यम से प्रोसेस किया जाता है। इसमें कचरे को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कर पुनः उपयोग योग्य सामग्री निकाली जाती है। मिट्टी जैसी सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण में, प्लास्टिक और धातुओं का पुनर्चक्रण किया जाता है, और ज्वलनशील पदार्थों से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार कर सीमेंट उद्योग और ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किया जाता है। इससे वर्षों पुरानी चुनौती का वैज्ञानिक समाधान और संसाधनों का पुनः उपयोग संभव होता है।
