राजस्थान में राजसखी पंच गौरव रथ का शुभारंभ, ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

राजस्थान में राजसखी पंच गौरव रथ का शुभारंभ हुआ, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। यह रथ जयपुर के विभिन्न स्थानों पर घूमेगा, जिससे स्थानीय उत्पाद सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेंगे। इस पहल से ग्रामीण उद्यमियों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। कार्यक्रम में जिला कलक्टर और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल का समर्थन किया।
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राजसखी पंच गौरव रथ का उद्घाटन


जयपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) ने ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए रविवार को 'राजसखी पंच गौरव रथ' का शुभारंभ किया।


इस कार्यक्रम का आयोजन एसआईएएम, दुर्गापुरा, जयपुर में किया गया, जहां जिला कलक्टर जयपुर संदेश नायक और जिला परिषद् जयपुर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा ने रथ को रवाना किया।


राजसखी पंच गौरव रथ के माध्यम से राजीविका से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए विभिन्न स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों का प्रदर्शन, प्रचार-प्रसार और बिक्री की जाएगी। यह रथ जयपुर के प्रमुख स्थानों पर घूमेगा, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमियों के उत्पाद सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेंगे।


इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, उनकी आय और आजीविका के अवसरों में वृद्धि करना और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाना है। इसके साथ ही पंच गौरव कार्यक्रम के माध्यम से जिले के विशिष्ट उत्पादों और स्थानीय विशेषताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।


रथ में ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, सजावटी और उपयोगी वस्तुएं, खाद्य उत्पाद और अन्य स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। जयपुर के विभिन्न स्थानों पर इनकी बिक्री से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए प्रत्यक्ष बाजार और ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।


कार्यक्रम में पुष्पेंद्र सिंह, जिला प्रबंधक–आजीविका; इंदिरा शर्मा, सीएलएफ मैनेजर और राजीविका से जुड़ी अन्य महिलाएं एवं अधिकारी उपस्थित रहे।


राजसखी पंच गौरव रथ ग्रामीण महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ 'लोकल फॉर वोकल' और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।