राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से आम जनता की चिंता बढ़ी

राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जयपुर सहित कई जिलों में ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। मई में यह चौथी बार है जब कीमतों में वृद्धि हुई है। विपक्ष ने सरकार से राहत की मांग की है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि इसका मुख्य कारण है। इस बढ़ोतरी का असर न केवल वाहन चालकों पर, बल्कि हर घर पर पड़ेगा।
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राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से आम जनता की चिंता बढ़ी gyanhigyan

राजस्थान में ईंधन की कीमतों में वृद्धि

राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राजधानी जयपुर सहित कई जिलों में ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, जयपुर में पेट्रोल की कीमत 2.82 रुपए और डीजल की कीमत 2.73 रुपए प्रति लीटर बढ़ गई है। अब जयपुर में पेट्रोल की कीमत 109.84 रुपए से बढ़कर 112.66 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 95.05 रुपए से बढ़कर 97.78 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है.


मई में चौथी बार कीमतों में वृद्धि

मई महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह चौथी बार वृद्धि हुई है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।


• 15 मई को लगभग 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई।
• 19 मई को दोनों ईंधनों के दाम औसतन 90 पैसे बढ़ाए गए।
• 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ।
• 25 मई को फिर पेट्रोल 2.61 रुपए और डीजल 2.71 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए गए।


लगातार बढ़ती कीमतों के कारण लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है।


एक्सपी पेट्रोल की कीमतों में भी वृद्धि

सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ एक्सपी पेट्रोल की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। जयपुर में एक्सपी पेट्रोल की कीमत अब 119.15 रुपए से बढ़कर 121.97 रुपए प्रति लीटर हो गई है।


विपक्ष ने राहत की मांग की

ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि को लेकर विपक्ष ने राजस्थान सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार से वैट कम करने की मांग की है, यह कहते हुए कि बढ़ती कीमतों से आम जनता का बजट प्रभावित हो रहा है।


महंगाई पर पड़ेगा प्रभाव

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव हर घर तक पहुंचेगा।


मालभाड़ा बढ़ने की संभावना

ट्रकों और मालवाहक वाहनों के खर्च में वृद्धि से सब्जियां, फल, राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। दूसरे राज्यों से आने वाले सामान की ढुलाई लागत में वृद्धि का सीधा असर बाजार पर दिखाई देगा।


खेती की लागत में वृद्धि

डीजल की कीमतों में वृद्धि से किसानों की लागत भी बढ़ जाएगी। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप चलाने में अधिक खर्च आएगा, जिससे अनाज और फसलों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।


सार्वजनिक परिवहन पर असर

सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।


राजस्थान के प्रमुख जिलों में पेट्रोल के नए रेट

जयपुर में पेट्रोल की कीमत 112.66 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं, कोटा में 112.21, सीकर में 113.59, अजमेर में 112.31, उदयपुर में 113.49 और जोधपुर में 112.49 रुपए प्रति लीटर नया रेट तय किया गया है। भीलवाड़ा में मामूली बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल 112.98 रुपए प्रति लीटर हो गया है।


डीजल की कीमतें भी उच्चतम स्तर पर

जयपुर में डीजल की कीमत 97.78 रुपए प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा, कोटा में 97.36, सीकर में 98.62, अजमेर में 97.46, उदयपुर में 98.52 और जोधपुर में 97.63 रुपए प्रति लीटर डीजल बिक रहा है। भीलवाड़ा में डीजल 98.07 रुपए प्रति लीटर हो गया है।


पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि इसका मुख्य कारण है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। पहले जहां कच्चा तेल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में वृद्धि आवश्यक हो गई थी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं।


पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर ईंधन के दाम तय किए जाते हैं।


इसके बाद रिफाइनिंग खर्च, कंपनियों का मार्जिन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट जोड़ने के बाद उपभोक्ताओं तक अंतिम कीमत पहुंचती है। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें भिन्न होने के कारण हर शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी अलग-अलग होती हैं।