राजस्थान में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियाँ लागू
राजस्थान में टेक्सटाइल क्षेत्र का विकास
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का उद्देश्य है कि प्रदेश के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इसी दिशा में, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने लगभग 15 नई नीतियों को लागू किया है। राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति-2025 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक विशेष राज्य स्तरीय टेक्सटाइल सेल का गठन किया गया है। इसके साथ ही, राज्य में पहली बार 11 जिलों के लिए जिला स्तरीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट एक्शन प्लान भी तैयार किया गया है। इसमें भारत सरकार द्वारा चुने गए 7 चैंपियन जिले (अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जोधपुर और कोटा) और 4 एस्पाइरेशनल जिले (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर और चूरू) शामिल हैं.
उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त नीलाभ सक्सेना ने बताया कि यह सेल राज्य में टेक्सटाइल इकाइयों को प्रोत्साहित करने और नवीनतम तकनीकों की जानकारी प्रदान करने के लिए कई प्रयास करेगी। इसमें औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर समस्याओं की पहचान, उद्योग विशेषज्ञों, उद्यमियों और निर्यातकों के साथ संवाद, देश-विदेश के प्रमुख वस्त्र केंद्रों का अध्ययन, और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वस्त्र प्रदर्शनियों में भागीदारी शामिल है। इसके अलावा, टेक्सटाइल क्षेत्र से संबंधित डेटा का संकलन और विश्लेषण भी किया जाएगा। इस वर्ष अक्टूबर में एक दो दिवसीय टेक्सटाइल समिट का आयोजन भी प्रस्तावित है। सरकार ने राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (रिप्स) के तहत टेक्सटाइल को थ्रस्ट क्षेत्र घोषित कर अतिरिक्त लाभ प्रदान किए हैं.
सक्सेना ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक वस्त्र एवं परिधान निर्यात को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। राजस्थान में भी इस क्षेत्र के निर्यात को 3-4 गुना बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है। राजस्थान का कुल निर्यात वर्ष 2024-25 में 97,171 करोड़ रुपये से अधिक था, जिसमें टेक्सटाइल और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों का हिस्सा लगभग 13,500 करोड़ रुपये था, जो कुल निर्यात का 13 प्रतिशत से अधिक है.
राजस्थान ऊन उत्पादन में पहले और कपास उत्पादन में पांचवें स्थान पर है। वर्तमान में प्रदेश में 1,800 से अधिक टेक्सटाइल और अपैरल यूनिट्स हैं। राजस्थान का वस्त्र उद्योग अपनी पारंपरिक तकनीकों, हैंडब्लॉक प्रिंटिंग और विभिन्न वस्त्रों के लिए विश्वभर में एक विशेष पहचान रखता है। राज्य से विभिन्न टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है और इस क्षेत्र में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं, जिसके लिए वर्तमान सरकार लगातार प्रयासरत है.
