राजस्थान में कर्मचारियों के लिए नई पदोन्नति नीतियाँ और लाभ

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कर्मचारियों के लिए नई पदोन्नति नीतियों की घोषणा की है, जिसमें अनुभव में छूट और नए पदों का सृजन शामिल है। उन्होंने कहा कि सुशासन के लिए कर्मचारियों का संतोष और प्रेरणा आवश्यक है। नई नीतियों से हजारों कर्मचारियों को लाभ होगा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, महिला सशक्तीकरण और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
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मुख्यमंत्री का कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश


जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जन कल्याणकारी योजनाओं और नीतियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ लागू करने से सुशासन की स्थापना होती है। इसके लिए सक्षम और संतुष्ट कार्मिकों की व्यवस्था आवश्यक है। राज्य सरकार ने इसी दृष्टिकोण के तहत कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए पदोन्नति प्रक्रिया को सरल बनाया है। इसके साथ ही, सचिवालय की प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, ताकि कार्मिकों का मनोबल बढ़ सके और शासन व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सके.


मुख्यमंत्री ने रविवार को राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी एवं सचिवालय कर्मचारी संघ द्वारा पदोन्नति के लिए अनुभव में 2 वर्ष की छूट और नए पदों के सृजन के लिए अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नागरिक सर्वाेपरि विजन को राज्य सरकार शासन की कार्य-संस्कृति का आधार बनाकर आगे बढ़ा रही है। सचिवालय सरकार की नीतियों, योजनाओं और जनकल्याणकारी निर्णयों का केंद्र है। हर निर्णय और प्रयास प्रदेश की 8 करोड़ जनता के विश्वास को और मजबूत करने वाला होना चाहिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी गुड गवर्नेंस की धुरी और विकसित राजस्थान-2047 के महत्वपूर्ण सारथी हैं। हमारी सरकार समयबद्ध और नियमित पदोन्नति देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में, कार्मिकों को पदोन्नति के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 में निर्धारित अनुभव में 2 वर्ष की छूट दी गई है। जिन कार्मिकों ने पिछले तीन वर्षों में इस छूट का लाभ नहीं लिया है, उन्हें इसका लाभ मिलेगा।


मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में केंद्र सरकार के अनुरूप ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, 30 जून को सेवानिवृत्त राज्य कार्मिकों को नोशनल वेतन वृद्धि के अनुरूप पेंशन का प्रावधान किया गया है। पेंशनरों के 70 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन भत्ता और कर्मचारी की मृत्यु होने पर 10 वर्ष तक बढ़ी हुई पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान किया गया है।


महिला सशक्तीकरण की दिशा में सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में पुत्रवधू को शामिल किया है। एकल महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव को 3 के स्थान पर 6 चरणों में स्वीकृत किया गया है। कार्यस्थल पर बेहतर और तनावमुक्त वातावरण देने के लिए ‘मुख्यमंत्री शिशु-वात्सल्य सदन’ स्थापित किया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय की कार्यकुशलता को और मजबूत बनाने के लिए 15 सहायक शासन सचिव, 67 सहायक अनुभाग अधिकारी और 67 लिपिक ग्रेड प्रथम सहित कुल 149 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।


मुख्यमंत्री ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों से नई तकनीक, ई-गवर्नेंस और पेपरलेस व्यवस्था को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजस्थान को सुशासन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने में सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए।


राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ के अध्यक्ष अभिमन्यु शर्मा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर संवेदनशील फैसले लिए हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सभी कर्मचारी सरकार की भावना के अनुरूप जनहित में समर्पित रहेंगे।