राजस्थान में कंबल वितरण विवाद: मुस्लिम महिलाओं के समर्थन में खड़े हुए हिंदू पड़ोसी
कंबल वितरण कार्यक्रम में भेदभाव का मामला
राजस्थान के टोंक जिले के एक गांव में कंबल वितरण के दौरान भेदभाव का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ मुस्लिम महिलाओं से उनके धर्म का पता चलने पर कंबल वापस ले लिए गए, जिससे गांव में भारी आक्रोश फैल गया। इस घटना के बाद, हिंदू पड़ोसी मुस्लिम महिलाओं के समर्थन में खड़े हो गए हैं और भाईचारे की मिसाल पेश की है.
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 60 वर्षीय शकूरन बानो ने कहा कि कंबल न मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बेइज्जती का अनुभव हुआ। उनके हिंदू पड़ोसी भी इस व्यवहार से नाराज हैं। यह कार्यक्रम पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया द्वारा आयोजित किया गया था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले जनसंपर्क अभियान का हिस्सा था.
गांव के सरपंच और स्थानीय लोगों की बातें
गांव की सरपंच बीना देवी चौधरी के पति हनुमान चौधरी ने कहा कि गांव में भारी आक्रोश है। उन्होंने बताया कि हिंदू समुदाय के लोग भी इस घटना से नाराज हैं और जौनपुरिया का पुतला जलाया गया। शकूरन ने कहा कि आयोजकों ने उन्हें अलग बैठने के लिए कहा था, जिससे उन्हें बहुत बुरा लगा.
जौनपुरिया पर पड़ने वाला असर
इस घटना के बाद जौनपुरिया की काफी फजीहत हो रही है। एक वीडियो में कुछ लोग उन्हें टोकते हुए सुनाई दे रहे हैं। जौनपुरिया ने कहा कि कंबल सरकार के नहीं हैं, लेकिन लोगों ने उन्हें बताया कि उन्होंने गलती की है.
गांव में मुस्लिम समुदाय की स्थिति
हनुमान चौधरी ने बताया कि गांव में मुसलमानों की आबादी केवल 3 प्रतिशत है, लेकिन वे हमेशा सद्भाव से रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि जौनपुरिया ने भाईचारे को बिगाड़ने की कोशिश की है.
जौनपुरिया का स्पष्टीकरण
जौनपुरिया ने कहा कि कंबल वितरण उनका निजी कार्यक्रम था और उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को बुलाने का इरादा नहीं किया था। उन्होंने दावा किया कि महिलाएं कंबल बंटने की खबर सुनकर आई थीं.
शकूरन को मिले कंबल
घटना के बाद, शकूरन को दो कंबल मिले हैं, एक स्थानीय नेता से और दूसरा राजस्थान कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से। हालांकि, सर्दी खत्म होने के कारण उन्होंने कंबल को संभाल कर रखा है.
