राजस्थान में आदिवासी वन अधिकारों का उल्लंघन: NHRC की सख्त कार्रवाई
NHRC की कार्रवाई
नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान के धौलपुर जिले में अनुसूचित जनजातियों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के वन अधिकारों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया है।
आयोग ने जिला प्रशासन की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए धौलपुर के जिला मजिस्ट्रेट को तत्काल जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ग्राम खिन्नोट, तहसील सरमथुरा के निवासी रामेश्वर दयाल की शिकायत पर NHRC ने पाया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का जिला प्रशासन द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। पीढ़ियों से वन भूमि पर निर्भर आदिवासी समुदाय को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
शिकायतकर्ता रामेश्वर दयाल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और जिला परिषद ने न तो वन अधिकार अधिनियम की जागरूकता के लिए ग्राम सभाएं, पंचायत बैठकें या विशेष शिविर आयोजित किए और न ही दावों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। इसके परिणामस्वरूप हजारों योग्य आदिवासी परिवार दशकों से अपने अधिकारों से वंचित हैं।
आयोग की चेतावनी NHRC ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आयोग ने सभी पत्राचार केवल HRCNet पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार करने के निर्देश भी दिए हैं।
रामेश्वर दयाल, जो जिला अध्यक्ष आदिवासी मीणा पंच पटेल महापंचायत धौलपुर हैं, ने कहा, “जिले के हजारों जायज किसान वन अधिकारों से दशकों से वंचित किए जा रहे हैं। षड्यंत्र के तहत आदिवासी समाज के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। बार-बार लिखित सुझाव और शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि दाल में कुछ काला ही नहीं, पूरी दाल ही काली है। फिर भी अकेले हाथों से लड़ाई जारी रहेगी।”
NHRC ने दोहराया कि आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना राज्य प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की उपेक्षा अस्वीकार्य है।
