राजस्थान पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह: बेटियों का योगदान महत्वपूर्ण
राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में आयोजित नवम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बेटियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने पशुपालन और कृषि के महत्व पर जोर देते हुए युवाओं को नशामुक्त भारत की दिशा में काम करने की प्रेरणा दी। समारोह में 623 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। जानें और क्या कहा राज्यपाल ने इस अवसर पर।
| Oct 16, 2026, 16:56 IST
राज्यपाल का संबोधन
हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही बेटियां, कृषि और पशुपालन से जुड़े शोध कार्य में भी दें अपना योगदान:
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे
जयपुर: राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पशुपालन हमारे देश और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। यह न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण समुदायों को स्थायी आजीविका भी प्रदान करता है।
बागडे ने शुक्रवार को बीकानेर में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में यह बातें कहीं।
उन्होंने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जिसमें गिर, थारपारकर, साहिवाल और मुर्रा जैसी नस्लों का योगदान महत्वपूर्ण है। राजस्थान का दूध उत्पादन में लगभग 14.51 प्रतिशत हिस्सा है, जो इसे देश में दूसरे स्थान पर लाता है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है।
राज्यपाल ने कहा कि डेयरी उद्योग को बढ़ावा देना आवश्यक है, क्योंकि यह पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है। उन्होंने कृषि और पशुपालन को एक-दूसरे का पूरक बताया और कहा कि किसान दूध उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान और कृषि में अध्ययनरत बेटियों को शोध में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है, और कई विकसित देशों की बड़ी कंपनियों में भारतीय युवा कार्यरत हैं। यह हमारी असली ताकत है।
उन्होंने युवाओं की बौद्धिक क्षमता और कल्पना शक्ति की सराहना की और कहा कि नई शिक्षा नीति ने बच्चों के बौद्धिक स्तर को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है।
राज्यपाल ने कहा कि युवा शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कई विदेशी ताकतें युवाओं को नशे की ओर धकेलने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने युवाओं से जागरूक रहने और नशामुक्त भारत के लिए योगदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विवेक, समझ और नैतिकता का विकास करना है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में 2.55 करोड़ रुपये की लागत से बने कन्या छात्रावास का उद्घाटन किया।
समारोह में 462 विद्यार्थियों को स्नातक, 141 को स्नातकोत्तर, और 20 को विद्या-वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गई। कुल 623 उपाधियां वितरित की गईं।
कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
