राजस्थान के गांव में देह व्यापार: एक पारिवारिक पेशा
भारत में देह व्यापार की गंभीरता
भारत में देह व्यापार एक गंभीर समस्या है, जो अपराध की श्रेणी में आती है। इसके बावजूद, यह देश के विभिन्न हिस्सों में खुलेआम जारी है। पुलिस समय-समय पर छापे मारकर कई पीड़ित लड़कियों को बचाने का प्रयास करती है। यह एक ऐसा धंधा है जिसमें लड़कियां अपनी इच्छा से नहीं आती, बल्कि मजबूरी या दबाव के कारण अपने शरीर को बेचने पर मजबूर होती हैं।
नाबालिग लड़कियों की मांग
इस धंधे में नाबालिग लड़कियों की मांग भी काफी अधिक होती है। इसके परिणामस्वरूप, कई बार बच्चियों का अपहरण कर उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया जाता है। यदि इन लड़कियों को अवसर मिले, तो वे निश्चित रूप से कोई अन्य सम्मानजनक कार्य करना चाहेंगी।
खानदानी पेशा
हालांकि, आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लड़कियां मजबूरी से नहीं, बल्कि इसे अपने खानदानी पेशे के रूप में मानती हैं। इस गांव की महिलाएं कई दशकों से इस धंधे में हैं, और लड़कियां इसे अपने परिवार की परंपरा के रूप में आगे बढ़ाती हैं।
कम उम्र की लड़कियों का शोषण
यहां तक कि 10-12 साल की लड़कियों को भी इस धंधे में धकेल दिया जाता है। जैसे ही कोई लड़की जवानी की दहलीज पर कदम रखती है, परिवार वाले उसे देह व्यापार में लगा देते हैं। कम उम्र की लड़कियों को एक बार किसी पुरुष के साथ सोने के लिए 10,000 रुपए तक मिल जाते हैं, जबकि 18 साल से ऊपर की लड़कियां एक दिन में 1,500 से 2,000 रुपए कमा लेती हैं।
ग्राहकों की पहचान
इन लड़कियों के लिए ग्राहक ढूंढने वाले लोग भी कमीशन लेते हैं। अधिकतर ग्राहक हाईवे पर आने-जाने वाले ट्रक ड्राइवर होते हैं। यहां कम उम्र की लड़कियों की मांग हमेशा अधिक रहती है। इस गांव की अधिकांश लड़कियां पारिवारिक पेशे के तहत इसमें आती हैं, जबकि कुछ को जबरन इसमें धकेल दिया जाता है।
गांव का नाम
आप में से कई लोग इस गांव का नाम जानने के लिए उत्सुक होंगे। यह गांव राजस्थान के भरतपुर में स्थित है, जहां देह व्यापार एक पारिवारिक पेशा माना जाता है। इस समुदाय के कुछ लोग मध्यप्रदेश में भी पाए जाते हैं।
कानूनी चेतावनी
यदि आप इस गांव का दौरा करने का सोच रहे हैं, तो सावधान रहें। देह व्यापार भारत में कानूनी रूप से अपराध है। इन लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध बनाकर आप इस अपराध को बढ़ावा देंगे। इसलिए, आपको इस तरह की गतिविधियों से दूर रहना चाहिए। आपकी वजह से ही मासूम बच्चियों को शिक्षा के बजाय इस धंधे में धकेल दिया जाता है।
