राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर असम की अनदेखी का आरोप लगाया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने असम में एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने राज्य की अनदेखी की है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की आगामी विधानसभा चुनावों में जीत का विश्वास व्यक्त किया और असम की सांस्कृतिक समृद्धि की प्रशंसा की। सिंह ने कहा कि भाजपा असम की पहचान और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस के कुशासन के कारण राज्य में उग्रवाद और गरीबी की चर्चा का भी उल्लेख किया। जानें इस रैली में और क्या कहा गया।
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राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर असम की अनदेखी का आरोप लगाया

राजनाथ सिंह की चुनावी रैली में कांग्रेस की आलोचना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को असम के प्रति कांग्रेस पार्टी की उपेक्षा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। तेजपुर में एक चुनावी सभा के दौरान, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राज्य के साथ सौतेला व्यवहार किया है। सिंह ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की उम्मीद जताई। एनडीए के उम्मीदवार और असम गण परिषद के नेता पृथ्वीराज राभा के साथ मिलकर उन्होंने असम की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर की सराहना की।


राजनाथ ने कहा कि असम की भूमि संस्कृति और प्रकृति में समृद्ध है। असम की चाय की खुशबू न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रसिद्ध है। यह साहस की भूमि है, जहां महान नायक लचित बोरफुकन का जन्म हुआ। असम के वीरों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। उनके जज्बे को देखकर मुझे विश्वास है कि कोई भी ताकत भाजपा सरकार के गठन को रोक नहीं सकती।


सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा असम की संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने यह संकल्प लिया है कि असम की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहनी चाहिए। हिमंता के नेतृत्व में दो इंजन वाली सरकार यहां कार्यरत है, जिससे असम ने भारत में एक विशिष्ट पहचान प्राप्त की है। कांग्रेस ने हमेशा असम की अनदेखी की है और यहां के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया है। कांग्रेस के कुशासन के कारण यहां की चर्चा उग्रवाद, गरीबी और अशांति के इर्द-गिर्द घूमती रही है।


सिंह ने असम के परिदृश्य में आए बदलावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब समय बदल चुका है। आज पूरी दुनिया में भूखमरी या उग्रवाद की बातें नहीं होतीं, बल्कि अब विकास की चर्चा होती है, जो भाजपा की वजह से संभव हो पाई है। कांग्रेस के शासन में कई सीमावर्ती गांवों को 'पिछड़े गांव' कहा जाता था, लेकिन भाजपा ने उन्हें 'पहले गांव' का दर्जा दिलाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर का 30 बार दौरा किया है, जबकि कांग्रेस के शासन में प्रधानमंत्री का इस क्षेत्र में दौरा बहुत कम होता था।