राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला, भाजपा में विलय के बाद के बयान

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने के बाद अपनी पूर्व पार्टी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़ी है 'डर से नहीं, बल्कि घृणा से'। चड्ढा ने पार्टी में ईमानदार सदस्यों की कमी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी बताया कि कई सांसद एक साथ पार्टी छोड़ने का निर्णय ले चुके हैं। चड्ढा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्हें लंबे समय से ऐसा महसूस हो रहा था कि वे गलत पार्टी में हैं।
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राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला, भाजपा में विलय के बाद के बयान gyanhigyan

राघव चड्ढा का बयान

आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने के एक दिन बाद, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपनी पूर्व पार्टी पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़ी है "डर से नहीं, बल्कि घृणा से"। चड्ढा ने यह स्पष्ट किया कि जो लोग यह सोचते हैं कि उन्होंने दबाव में पार्टी छोड़ी, वे गलत हैं। उन्होंने कहा कि उनकी निराशा और घृणा के कारण उन्होंने आम आदमी पार्टी को छोड़ा।


पार्टी में ईमानदार सदस्यों की कमी

चड्ढा ने यह भी कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने बनाने में योगदान दिया, उसमें अब ईमानदार और मेहनती सदस्यों के लिए कोई स्थान नहीं रह गया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि हर सच्चा देशभक्त, जिसने आम आदमी पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा, या तो पार्टी छोड़ चुका है या छोड़ने की तैयारी में है। चड्ढा ने कहा कि पार्टी अब एक गलत दिशा में जा रही है, जिससे कोई भी जुड़ना नहीं चाहता।


सांसदों का सामूहिक निर्णय

चड्ढा ने यह भी बताया कि कई सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टी भ्रष्ट और समझौतावादी हाथों में जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सात सांसद एक साथ आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले हैं। उन्होंने संविधान के उन प्रावधानों का उल्लेख किया जो निर्वाचित प्रतिनिधियों को पार्टी छोड़ने की अनुमति देते हैं यदि उन्हें लगता है कि पार्टी अपने मूल मार्ग से भटक गई है।


राजनीति में आगे बढ़ने का विकल्प

आम आदमी पार्टी में अपने अनुभव को याद करते हुए चड्ढा ने कहा कि उन्हें लंबे समय से ऐसा महसूस हो रहा था कि वे बेमेल हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें ऐसा लग रहा था कि वे गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। चड्ढा ने कहा कि उनके पास केवल दो विकल्प थे: या तो राजनीति छोड़ दें या अपनी ऊर्जा और अनुभव का उपयोग करके सकारात्मक राजनीति करें।