राकेश शर्मा का 77वां जन्मदिन: भारतीय अंतरिक्ष यात्री की प्रेरणादायक यात्रा

राकेश शर्मा, जो 13 जनवरी को अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं, पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने 1984 में सोवियत स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरी और अपने अनुभवों से देश को गर्वित किया। उनके जीवन की यात्रा, शिक्षा, अंतरिक्ष में किए गए प्रयोग और प्राप्त पुरस्कारों के बारे में जानें।
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राकेश शर्मा का 77वां जन्मदिन: भारतीय अंतरिक्ष यात्री की प्रेरणादायक यात्रा

राकेश शर्मा का जन्मदिन

आज, 13 जनवरी को, राकेश शर्मा, जो पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं, अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने सोवियत स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरकर विश्व के 138वें अंतरिक्ष यात्री बनने का गौरव प्राप्त किया। राकेश शर्मा ने वहां सात दिनों तक बिताए। उनकी स्पेस यात्रा के दौरान, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा था कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है। उनके उत्तर ने पूरे देश को गर्व से भर दिया। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन की कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...


शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद हैदराबाद के निजाम कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, 1966 में, उन्होंने नेशनल डिफेंस अकेडमी में प्रवेश लिया और 1970 में भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।


अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव

इस दौरान, राकेश शर्मा को भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बनने का अवसर मिला। 20 सितंबर 1982 को, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने उन्हें अंतरिक्ष एजेंसी इंटरकॉसमॉस के मिशन के लिए चुना। 02 अप्रैल 1984 को, उन्होंने सोवियत संघ के बैकानूर से सोयूज टी-11 अंतरिक्ष यान में उड़ान भरी। इस मिशन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया।


अंतरिक्ष में रहते हुए, उन्होंने जीवन विज्ञान से संबंधित प्रयोग किए और 9 घंटे तक अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया। उन्होंने 7 दिन और 21 घंटे अंतरिक्ष में बिताए, जिसमें सिलिकन फ्यूजिंग टेस्ट जैसे कई प्रयोग शामिल थे।


'सारे जहां से अच्छा'

जब इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से पूछा कि भारत बाहरी अंतरिक्ष से कैसा दिखता है, तो उन्होंने प्रसिद्ध उत्तर दिया, 'सारे जहां से अच्छा।'


सम्मान और पुरस्कार

स्पेस यात्रा के बाद, राकेश शर्मा को 'हीरो ऑफ सोवियत यूनियन' का सम्मान मिला, जो कि किसी भारतीय को प्राप्त होने वाला पहला सम्मान था। इसके अलावा, भारत ने उन्हें शांतिकाल का सर्वोच्च पुरस्कार 'अशोक चक्र' से भी नवाजा।