रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लखनऊ में इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र का दौरा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में अशोक लेलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने हल्के सामरिक वाहनों और अन्य उत्पादों के निर्माण की समीक्षा की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में रक्षा गलियारे की स्थापना और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। इस संयंत्र का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ होगा। जानें इस दौरे के दौरान और क्या महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लखनऊ में इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र का दौरा

रक्षा मंत्री का महत्वपूर्ण दौरा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में अशोक लेलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण संयंत्र का दौरा किया। इस अवसर पर, उन्होंने हल्के सामरिक वाहनों, मानवरहित जमीनी वाहनों, बारूदी सुरंग से सुरक्षित वाहनों और लॉजिस्टिक ड्रोन के उत्पादन की समीक्षा की। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल थे।


अपने उद्घाटन भाषण में, राजनाथ सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक रक्षा गलियारा स्थापित किया गया है, जहां सशस्त्र बलों के लिए हथियार और गोला-बारूद का निर्माण लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, चित्रकूट और अलीगढ़ में किया जा रहा है।


निवेश और औद्योगीकरण की दिशा में कदम

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में 34,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है, जिससे बड़ी कंपनियों का आगमन हुआ है और स्थानीय लोगों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने लखनऊ में ब्रह्मोस फैक्ट्री की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब अपने हथियारों का निर्माण स्वयं कर रहा है।


राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार की नई नीति का भी जिक्र किया, जिसमें एयरोस्पेस और रक्षा इकाइयों के लिए रोजगार प्रोत्साहन शामिल है। उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि 2014 में घरेलू रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।


औद्योगिक विकास की नई दिशा

राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के औद्योगीकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य अब औद्योगिक विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि अशोक लेलैंड का इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण लाभ लाएगा और राज्य के आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा।


यह संयंत्र 60 महीनों में तैयार होने का लक्ष्य रखता था, लेकिन इसे रिकॉर्ड 18 महीनों में पूरा किया गया है। हर साल यहां से 2,500 इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन होगा।