योगी कैबिनेट में नए मंत्रियों की संभावित नियुक्ति, 6 विधायकों को मिल सकती है जगह
लखनऊ: कैबिनेट विस्तार की तैयारी
उत्तर प्रदेश में मंत्री बनने की उम्मीद लगाए विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार कल होने की संभावना है। आज शाम को मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मुलाकात की, जिससे कैबिनेट विस्तार की अटकलें बढ़ गई हैं। सूत्रों के अनुसार, इस विस्तार में छह नए मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है। यूपी में विधायकों की संख्या के अनुसार, कुल 60 मंत्री हो सकते हैं।
नए मंत्रियों की संभावित सूची
लोकसभा चुनाव के बाद, यूपी में कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद और राज्यमंत्री अनूप प्रधान अब सांसद बन चुके हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्रियों सहित मंत्रिमंडल में 54 सदस्य हैं, जिनमें 21 कैबिनेट, 14 स्वतंत्र प्रभार और 19 राज्यमंत्री शामिल हैं। इस प्रकार, योगी मंत्रिमंडल में छह नए मंत्रियों की नियुक्ति की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, पहले पार्टी आलाकमान कुछ मंत्रियों को हटाने पर विचार कर रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं किया जाएगा। केवल छह विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा।
मनोज पांडेय और पूजा पाल के नाम चर्चा में
2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सात विधायकों ने बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग की थी। इनमें से मनोज पांडेय और पूजा पाल को मंत्री बनाए जाने की संभावना है। मनोज पांडेय ब्राह्मण हैं और पूजा पाल ओबीसी समुदाय से आती हैं।
पूजा पाल का राजनीतिक सफर
पूजा पाल, इलाहाबाद के पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी हैं। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ राजू पाल की हत्या के मुख्य आरोपी थे। पूजा पाल ने 2022 में विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा था, लेकिन राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की और अखिलेश यादव के खिलाफ बयान दिया, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया।
भूपेंद्र चौधरी और अन्य संभावित मंत्री
यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना भी तय माना जा रहा है। इसके अलावा, कृष्णा पासवान, अशोक कटारिया और सुरेन्द्र दिलेर के नाम भी चर्चा में हैं। हंसराज विश्वकर्मा और आशा मौर्य का नाम भी मंत्री पद के लिए चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल हो सकता है।
योगी आदित्यनाथ ने 2022 में अपने दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री पद संभाला था। इस दौरान यूपी कैबिनेट का पहला विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। 2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का ध्यान रखा जाएगा।
