योगी आदित्यनाथ ने क्षमता निर्माण कार्यक्रम को अनिवार्य बनाने का निर्देश दिया
मुख्यमंत्री का निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम को अनिवार्य करने का आदेश दिया। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में साझा की गई।
बैठक में हुई चर्चा
आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक में 'मिशन कर्मयोगी' के तहत राज्य में अब तक की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना की गहन समीक्षा की। इस बैठक में मिशन के कार्यान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थिति और विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण
इस दौरान, क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश में मिशन के कार्यान्वयन की स्थिति पर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की।
मिशन कर्मयोगी का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मिशन कर्मयोगी' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आत्मसात करते हुए सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है, जो प्रदेश और देश के विकास में सहायक बन सकें।
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
क्षमता संवर्धन का लक्ष्य
बयान के अनुसार, बैठक में योगी को बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के तहत केंद्र में 30 लाख से अधिक सिविल सेवकों, राज्यों में लगभग 2.2 करोड़ कार्मिकों और शहरी स्थानीय निकायों तथा पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 50 लाख कार्मिकों को क्षमता संवर्धन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
आदेश का कार्यान्वयन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम को अनिवार्य किया जाए और इसे उनकी पदोन्नति एवं वार्षिक गोपनीयता रिपोर्ट (एसीआर) से भी जोड़ा जाए।
