योगी आदित्यनाथ का वृक्षारोपण अभियान: 35 करोड़ पौधों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष 35 करोड़ पौधों के रोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने जनभागीदारी से वृक्षारोपण को एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की बात की। पिछले वर्षों में वृक्षारोपण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें 2017 से 2025 के बीच 242.13 करोड़ पौधे लगाए गए। मुख्यमंत्री ने पौधों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग पर जोर दिया है, साथ ही सभी विभागों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
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मुख्यमंत्री का वृक्षारोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष 35 करोड़ पौधों के रोपण का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में जनसहयोग से प्रदेश ने वृक्षारोपण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और इसे अब एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। रविवार को वृहद पौधरोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए, मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हर आंगनबाड़ी केंद्र में कम से कम 5 सहजन के पौधे लगाने का आह्वान किया। इसके साथ ही, स्कूल और कॉलेजों के छात्रों से भी एक-एक पौधा लगाने की अपील की गई। मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।


वृक्षारोपण में हुई प्रगति

बैठक में बताया गया कि पिछले वर्षों में वृक्षारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2009 से 2016 के बीच 51.48 करोड़ पौधे लगाए गए, जबकि 2017 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 242.13 करोड़ हो गई। इस अवधि में वन और वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की वृद्धि हुई है, जिससे हरित आवरण लगभग 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कार्बन स्टॉक में भी प्रदेश ने 2.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत (1.13 प्रतिशत) से अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को हरित क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाते हुए 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल करना है।


वृक्षारोपण अभियान की योजना

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 के अभियान को पूरी तरह वैज्ञानिक और योजनाबद्ध बनाया जाए। उन्होंने माइक्रो प्लानिंग को अभियान की आधारशिला बताते हुए ग्रामीण और शहरी स्तर पर सभी माइक्रो प्लानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की बात कही। पौधों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सभी विभागों को वन विभाग की नर्सरियों से निःशुल्क और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।


पौधों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री ने पौधों की सुरक्षा और उनकी जीवितता सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। ‘हरीतिमा’ ऐप, जीआईएस मैपिंग, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग और प्लांटेशन मॉनीटरिंग सिस्टम (पीएमएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वृक्षारोपण की निगरानी की जा रही है। 2025 के विशेष सर्वेक्षण में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की जीवितता 80 प्रतिशत दर्ज की गई।


विशेष पहल और कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर वन/वाटिका स्थापित करने पर जोर दिया और नदियों के किनारे तथा हाइवे पर पौधे लगाने की बात कही। इस वर्ष अयोध्या में रामायणकालीन पौधे लगाने पर भी जोर दिया गया। सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि 30 मई तक अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें और निर्धारित समय के अनुसार वृक्षारोपण सुनिश्चित करें। जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।


रामसर साइट का प्रमाण पत्र

बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग ने मुख्यमंत्री को ‘शेखा झील पक्षी विहार, अलीगढ़’ के रामसर साइट घोषित होने का प्रमाण पत्र सौंपा। उत्तर प्रदेश में कुल 12 रामसर स्थल नामित किए जा चुके हैं, जो 38,992.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल को कवर करते हैं। शेखा झील पक्षी विहार 40.309 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे छोटा रामसर स्थल है।