यूक्रेन का पाकिस्तान के साथ गहरा रिश्ता: सुरक्षा समझौतों की नई परतें

यूक्रेन ने पाकिस्तान के साथ अपने लंबे समय के संबंधों को और मजबूत किया है, हाल ही में सऊदी अरब के साथ सुरक्षा समझौतों के माध्यम से। यह नया गठबंधन भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि यूक्रेन ने पहले भी पाकिस्तान को सैन्य सहायता प्रदान की है। जानें कैसे यूक्रेन ने अपने हितों के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मिलकर काम किया है, और यह भारत की सुरक्षा पर क्या प्रभाव डाल सकता है।
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यूक्रेन का पाकिस्तान के साथ गहरा रिश्ता: सुरक्षा समझौतों की नई परतें

यूक्रेन की रणनीति और पाकिस्तान के साथ संबंध

यूक्रेन का पाकिस्तान के साथ गहरा रिश्ता: सुरक्षा समझौतों की नई परतें

कीव: यूक्रेन की नीति हमेशा से लाभ और वित्तीय लाभ पर केंद्रित रही है। भारत जैसे महत्वपूर्ण देश को धोखा देने वाला यूक्रेन, पाकिस्तान के साथ अपने लंबे संबंधों के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान को हथियारों की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश यूक्रेन है, जिससे उसने लगभग 411 मिलियन डॉलर की कमाई की है। अब, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा सहयोगियों की तलाश शुरू कर दी है। उन्होंने सऊदी अरब के साथ एक ड्रोन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो पहले से ही पाकिस्तान का करीबी सहयोगी माना जाता है। हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा सौदा हुआ है, जिसमें यूक्रेन ने भी अपनी भागीदारी दिखाई है.

जेलेंस्की ने सऊदी अरब के साथ एक आपसी लाभकारी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह वही यूक्रेन है जिसने कभी भारत के दुश्मन पाकिस्तान को टैंक और मिसाइलें देकर भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था। अब जब यूक्रेन खुद संकट में है, तो वह उन देशों के साथ सहयोग कर रहा है जो पाकिस्तान के करीबी सहयोगी माने जाते हैं.

यूक्रेन का धोखेबाज इतिहास
यूक्रेन का धोखेबाजी का इतिहास नया नहीं है। 1990 के दशक में, जब भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रयासरत था, तब यूक्रेन ने पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को बढ़ाने में मदद की थी। 1996 में, यूक्रेन ने पाकिस्तान के साथ 650 मिलियन डॉलर का एक बड़ा सौदा किया था, जिसके तहत उसने पाकिस्तान को 320 T-80UD मुख्य युद्धक टैंक प्रदान किए थे। ये टैंक आज भी पाकिस्तानी सेना की बख्तरबंद रेजिमेंट की रीढ़ माने जाते हैं और भारत की पश्चिमी सीमा पर तैनात हैं.

यूक्रेन के मालिशेव प्लांट ने पाकिस्तान के ‘अल-खालिद’ टैंकों के लिए 6TD-2 इंजन भी प्रदान किए थे। उस समय रूस ने इस डील का विरोध किया था क्योंकि टैंक के कई कलपुर्जे रूसी थे, लेकिन यूक्रेन ने भारत की चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया था.

इसके अलावा, यूक्रेन ने 2022-23 में पाकिस्तान को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया था, जब उसने गुप्त रूप से पाकिस्तान से 3000 करोड़ के हथियार खरीदे थे। पाकिस्तान ने यूक्रेन को 122mm और 155mm के आर्टिलरी शेल्स, रॉकेट्स और छोटे हथियारों की आपूर्ति की थी.

यूक्रेन का भारत के प्रति धोखा
यूक्रेन बार-बार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखाई देता है, जबकि भारत वह पहला देश था जिसने USSR से अलग होने के बाद यूक्रेन को मान्यता दी थी। दोनों देश एक समय में व्यापारिक साझेदार थे, लेकिन जब भारत ने न्यूक्लियर हथियार विकसित किए, तो यूक्रेन ने भारत का समर्थन नहीं किया और न्यूक्लियर परीक्षण के विरोध में खड़ा रहा.

सऊदी अरब के साथ नया समझौता
सऊदी अरब, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी रहा है, अब यूक्रेन के लिए एक नया हथियार बाजार बन गया है। जेलेंस्की ने रियाद में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यूक्रेन ने सऊदी अरब के आसमान को ईरानी ड्रोन से बचाने के लिए 201 एंटी-ड्रोन विशेषज्ञों को तैनात किया है। यूक्रेन अपनी ‘इंटरसेप्टर ड्रोन’ तकनीक सऊदी अरब को प्रदान कर रहा है ताकि वह अपनी तेल संपत्तियों की रक्षा कर सके.

एक ओर, यूक्रेन भारत से मदद की गुहार लगाता है, वहीं दूसरी ओर वह उन देशों के साथ सैन्य गठबंधन कर रहा है जो भारत-पाकिस्तान के समीकरणों में पाकिस्तान की ओर झुकाव रखते हैं.