यूएई दौरे के दौरान एस जयशंकर ने कूटनीतिक संदेश दिया
विदेश मंत्री एस जयशंकर का यूएई दौरा मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और यूएई के बीच संबंधों को मजबूत करना और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जयशंकर ने इस दौरे के दौरान पीएम मोदी की शुभकामनाएं दीं और यूएई की भूमिका की सराहना की। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान के प्रति यूएई की नाराजगी और ईरान के मुद्दे पर चल रही चर्चाओं का भी उल्लेख किया। जानें इस दौरे के पीछे की कूटनीतिक रणनीति और इसके संभावित प्रभाव।
| Apr 13, 2026, 20:56 IST
एस जयशंकर का यूएई दौरा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का अचानक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना मानी जा रही है। इस दौरे की समयावधि पर चर्चा हो रही है कि आखिरकार तनाव के इस माहौल में उनका यूएई जाना क्यों आवश्यक था और इसके पीछे का कूटनीतिक उद्देश्य क्या है। एस जयशंकर का यूएई पहुंचना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में भारत की कूटनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात को विशेष सम्मान बताया और पीएम मोदी की ओर से यूएई नेतृत्व को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच यूएई ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देखभाल की है। इसके साथ ही, उन्होंने भारत और यूएई के संबंधों को और मजबूत करने की बात की, जिसमें यूएई की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा
यह दौरा उस समय हुआ है जब स्टेट ऑफ हॉर्मोस में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव ने इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को बाधित किया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल के हफ्तों में, भारत ने तेल और गैस की आपूर्ति को फिर से संतुलित करने के लिए सऊदी अरब, क़तर और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के साथ बातचीत शुरू की है। इसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है।
कूटनीतिक और सुरक्षा मुद्दे
स्टेट ऑफ हॉर्मोस के बंद होने पर भी तेल और गैस की आपूर्ति को बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत बब अल मंदेव स्ट्रीट के माध्यम से गल्फ ऑफ अडन रूट से आपूर्ति जारी रखने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच, जयशंकर के दौरे के दौरान यूएई में पाकिस्तान के प्रति नाराजगी भी देखी गई है। यह संयोग है कि जयशंकर का दौरा उस समय हुआ जब ईरान के प्रति पाकिस्तान की नरमी का विरोध शुरू हो गया। यूएई के प्रभावशाली व्यक्ति अमजद ताहा ने भी इस पर टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय देश बताया। उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह ईरान का समर्थन करता है और खाड़ी देशों के खिलाफ उसके रुख की आलोचना नहीं करता। उन्होंने यूएई की नीतियों की सराहना की और कहा कि यूएई अपनी सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करता। यह सब बातें इस समय महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह दर्शाता है कि कूटनीतिक, सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं।
