यमन के हूती विद्रोहियों का बढ़ता प्रभाव: वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा
यमन में बढ़ते तनाव का वैश्विक प्रभाव
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती गतिविधियों ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, हूती बलों ने रणनीतिक पेरिम (मयून) द्वीप पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, जो बाब-अल-मंदेब के मुहाने पर स्थित है। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए चिंता का विषय
भारत से लगभग 3,000 किलोमीटर दूर चल रहे इस घटनाक्रम का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। बाब-अल-मंदेब के माध्यम से पश्चिम एशिया से भारत आने वाले कच्चे तेल और अन्य सामान की आवाजाही होती है। यदि इस समुद्री मार्ग पर असुरक्षा बढ़ती है या जहाजों को वैकल्पिक लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, तो शिपिंग लागत और यात्रा समय में वृद्धि हो सकती है।
तेल की कीमतों पर प्रभाव
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पहले से ही दबाव में है। रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे अधिक पहुंच गई हैं। बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर लगातार तनाव रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
व्यापार पर संभावित असर
बाब-अल-मंदेब एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि यहां जोखिम बढ़ता है, तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो सकती है। इसका प्रभाव केवल तेल पर ही नहीं, बल्कि अन्य आयात-निर्यात कारोबार पर भी पड़ने की संभावना है।
सुरक्षा का बड़ा सवाल
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हूतियों की बढ़ती पकड़ पूरे समुद्री मार्ग की सुरक्षा को प्रभावित करेगी। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत सहित एशिया और यूरोप के व्यापार पर भी पड़ सकता है।
