मोहन भागवत का हिंदू एकता का संदेश: भेदभाव का कोई स्थान नहीं
मोहन भागवत ने मथुरा में आयोजित सनातन संस्कृति महोत्सव में हिंदू समुदाय में एकता का आह्वान किया। उन्होंने भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए कहा कि समाज में सभी को एकजुट होना चाहिए। भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह के संदर्भ में भी चर्चा की, जिसमें उन्होंने इसे वीरता का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का क्षण बताया। जानें उनके विचार और संघ की स्थापना के बारे में।
| Jan 10, 2026, 19:32 IST
हिंदू समुदाय में एकता का आह्वान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को मथुरा के वृंदावन में आयोजित सनातन संस्कृति महोत्सव में भाग लेते हुए हिंदू समुदाय में एकता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। भागवत ने समारोह में कहा कि भले ही बाहरी दुनिया हिंदू समुदाय को जाति, धर्म, संप्रदाय और भाषा के आधार पर विभाजित देखती हो, लेकिन वास्तव में सभी एक हैं।
भेदभाव के खिलाफ आवाज
भागवत ने जोर देकर कहा कि समाज में भेदभाव का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम जिस समाज में रहते हैं, उसे एक मानते हैं। उनका मानना है कि पूरा हिंदू समाज एक है, फिर भी बाहरी दुनिया इसे विभाजित करने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि वे सभी प्रकार के हिंदुओं के मित्र हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं, सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देते हैं।
आरएसएस का शताब्दी समारोह
इससे पहले, मोहन भागवत ने 1 जनवरी को छत्तीसगढ़ के रायपुर में श्री राम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। आरएसएस के शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्होंने कहा कि देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवसर वीरता का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का क्षण है।
शक्ति प्रदर्शन नहीं, जिम्मेदारी का क्षण
हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि संघ के कार्य के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ये सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शक्ति प्रदर्शन का अवसर नहीं है। आरएसएस प्रमुख ने संगठन की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने अपने रक्त से इस संघ की नींव रखी थी।
