मोहन भागवत का बयान: भारत के ज्ञान की आवश्यकता पर जोर
भारत के ज्ञान की खोज
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने 31 जनवरी, 2026 को एक कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान में दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है और शासन, धर्म, और विज्ञान की विभिन्न प्रणालियों के 2000 वर्षों के प्रयोगों के बाद भारत के ज्ञान की तलाश कर रही है। यह टिप्पणी उन्होंने पश्चिम त्रिपुरा जिले के मोहनपुर में मां सौंदर्या चिन्मयी मंदिर के प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेकम कार्यक्रम के दौरान की।
भागवत ने बताया कि सदियों से कई वैश्विक मॉडल आजमाए गए हैं, लेकिन वे स्थायी शांति और संतोष स्थापित करने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2000 वर्षों में दुनिया ने कई प्रयोग किए हैं। पहले, सभी अधिकार राजा के पास होते थे, और लोगों का मानना था कि राजा का होना अच्छा है। लेकिन बाद में, राजा ने अपनी प्रजा को लूटना शुरू कर दिया। इसलिए, उन्होंने कहा कि ईश्वर ही राजाओं का राजा है, जिससे विभिन्न धर्मों का जन्म हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि मानवता ने शांति स्थापित करने के प्रयास किए, लेकिन अंततः रक्तपात हुआ। भागवत ने वैज्ञानिक युग की सीमाओं पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि विज्ञान ने बहुत सारी सुख-सुविधाएँ दी हैं, लेकिन संतोष नहीं। परिवारों में टूटन और अपराध में वृद्धि हो रही है। युद्ध एक बार शुरू होने पर रुकते नहीं हैं, और विकास के साथ पर्यावरण का विनाश भी बढ़ता जा रहा है।
भागवत ने यह भी कहा कि मानवता अब इन प्रयोगों के परिणामों का सामना कर रही है और अब, 2000 वर्षों के बाद, दुनिया लड़खड़ा रही है और भारत के ज्ञान की आवश्यकता महसूस कर रही है। यह भारत का कर्तव्य है, क्योंकि यही भारत के जीवन का उद्देश्य है। इस धार्मिक आयोजन में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
