मोहन भागवत का बयान: भारत की एकता संस्कृति और मातृभूमि पर आधारित है

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में भारत की अखंडता और एकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एकता हमारे पूर्वजों, संस्कृति और मातृभूमि पर आधारित है। भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ किसी का विरोधी नहीं है और सभी भारतीयों के बीच आपसी विश्वास का निर्माण होना चाहिए। उनके विचारों ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक आंदोलनों में संघ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। जानें उनके विचारों के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पूरा लेख पढ़ें।
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मोहन भागवत का बयान: भारत की एकता संस्कृति और मातृभूमि पर आधारित है

भारत की अखंडता पर मोहन भागवत का दृष्टिकोण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा कि भारत की एकता उसके पूर्वजों, संस्कृति और मातृभूमि पर निर्भर करती है। दिल्ली में तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के समापन पर, भागवत ने संघ से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि भारत की अखंडता एक जीवन सत्य है, जो हमारे पूर्वजों और संस्कृति के माध्यम से हमें एकजुट करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अखंड भारत केवल राजनीतिक दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि यह जनचेतना की एकता का प्रतीक है। जब यह भावना जागृत होगी, तब सभी लोग शांति और समृद्धि से रहेंगे। भागवत ने यह भी कहा कि यह धारणा गलत है कि संघ किसी के खिलाफ है।


 


आरक्षण पर संघ का समर्थन


भागवत ने आगे कहा कि हमारे पूर्वज और संस्कृति एक समान हैं। पूजा की विधियाँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन हमारी पहचान एक है। धर्म परिवर्तन से समुदाय नहीं बदलता। सभी पक्षों के बीच आपसी विश्वास का निर्माण होना चाहिए। मुसलमानों को यह डर छोड़ना होगा कि दूसरों के साथ सहयोग करने से उनका इस्लाम कमजोर होगा। उन्होंने मथुरा और काशी के संदर्भ में हिंदू समाज की भावनाओं को स्वाभाविक बताया। भागवत ने सवाल उठाया कि जब हम सभी एक हैं, तो हिंदू-मुस्लिम एकता की बात क्यों की जा रही है? हम सभी भारतीय हैं, इसलिए एकता का प्रश्न ही नहीं उठता।


 


मंगलवार और बुधवार को, भागवत ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी संवाद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संवाद किया। तीसरे दिन, उन्होंने संघ से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए। सम्मेलन का विषय था "आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा - नए क्षितिज"।


इस कार्यक्रम में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, उत्तरी क्षेत्र के संघचालक पवन जिंदल और दिल्ली प्रांत के संघचालक अनिल अग्रवाल भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रांत कार्यवाह अनिल गुप्ता ने किया।


 


संघ की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश


अपने भाषण में, भागवत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों में संघ की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ कभी भी सामाजिक आंदोलनों के लिए अलग झंडा नहीं उठाता, बल्कि जहाँ भी अच्छा कार्य हो रहा है, स्वयंसेवक योगदान देने के लिए स्वतंत्र हैं। भागवत ने संघ की कार्यपद्धति को स्पष्ट करते हुए कहा, "संघ का कोई अधीनस्थ संगठन नहीं है; सभी स्वतंत्र, स्वायत्त और आत्मनिर्भर हैं।" कभी-कभी संघ और उसके सहयोगी संगठनों या राजनीतिक दलों के बीच मतभेद दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यह सत्य की खोज का एक हिस्सा है। संघर्ष को प्रगति का साधन मानकर सभी अपने-अपने क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य करते हैं।