मोदी और ट्रंप की आगामी मुलाकात: जी7 शिखर सम्मेलन में क्या होगा?
मोदी और ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकातें हमेशा से चर्चा का विषय रही हैं। पिछले साल फरवरी में व्हाइट हाउस में हुई उनकी ऐतिहासिक मुलाकात के बाद से, दोनों नेताओं के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, अगले महीने फ्रांस में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में दोनों के आमने-सामने आने की संभावना है। ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार को देखते हुए, एक गुप्त बैठक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन क्या इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव में कमी आएगी? इसका उत्तर हमें जून में ही मिलेगा। भारत जी7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वह विशेष आमंत्रित के रूप में इन शिखर सम्मेलनों में भाग लेता है। इस वर्ष, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को 15-17 जून को होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है.
मोदी और ट्रंप के संबंधों का उतार-चढ़ाव
यह कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी और ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी, जब मोदी ट्रंप के पुनः सत्ता में आने के बाद व्हाइट हाउस का दौरा करने वाले पहले विश्व नेताओं में से एक बने। इस महत्वपूर्ण बैठक में, ट्रंप ने मोदी को अपने महान मित्र के रूप में संबोधित किया और दोनों ने 2030 तक भारत-अमेरिका व्यापार को दोगुना करके 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प लिया। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। ट्रंप ने एकतरफा तौर पर भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय अपने नाम कर लिया, जिससे भारत ने स्पष्ट रूप से विरोध किया। पिछले साल जून में कनाडा में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की फिर से मुलाकात की उम्मीद थी, लेकिन ट्रंप अचानक वहां से चले गए।
भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव
हालांकि, ट्रंप ने मोदी को कनाडा से लौटते समय वाशिंगटन में रुकने का निमंत्रण दिया, जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मोदी पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ फोटो खिंचवाने का दबाव डालने की कोशिश की, जो उस समय व्हाइट हाउस में आमंत्रित थे। भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ गया, जिसका एक कारण मोदी का ट्रंप के इशारों पर न चलना था। अमेरिका ने भारत पर 25% का टैरिफ लगाया और रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त 25% का टैरिफ लगाया। ट्रंप और उनके समर्थकों ने बार-बार भारत की आलोचना की, यह आरोप लगाते हुए कि रूस से तेल खरीदना यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्त पोषित कर रहा है।
