मोटापे का स्वास्थ्य पर प्रभाव: संक्रामक बीमारियों से मौतों का बड़ा कारण

एक नई अध्ययन में मोटापे को संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण बताया गया है। इस शोध में मोटापे और संक्रमण के बीच संबंध को स्पष्ट किया गया है, जिससे पता चलता है कि मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 70 प्रतिशत अधिक होता है। जानें इस अध्ययन के निष्कर्ष और भारत में इसके महत्व के बारे में।
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मोटापे का स्वास्थ्य पर प्रभाव: संक्रामक बीमारियों से मौतों का बड़ा कारण

मोटापे का बढ़ता खतरा

मोटापे का स्वास्थ्य पर प्रभाव: संक्रामक बीमारियों से मौतों का बड़ा कारण


दुनिया भर में मोटापा अब केवल डायबिटीज, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप तक सीमित नहीं रह गया है। यह संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों का एक महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक नई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है। इस अध्ययन के अनुसार, 2023 में वैश्विक स्तर पर संक्रमण से हुई हर 10 में से 1 मौत मोटापे से संबंधित हो सकती है।


अध्ययन के निष्कर्ष

यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक मोटापे और संक्रमण के बीच संबंध के बारे में ठोस सबूत सीमित थे। कोरोना महामारी के दौरान यह देखा गया था कि मोटे व्यक्तियों में गंभीर बीमारी और मृत्यु का खतरा अधिक होता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि क्या यह जोखिम अन्य संक्रामक बीमारियों पर भी लागू होता है। लैंसेट की यह स्टडी इस कमी को दूर करने का प्रयास करती है।


शोध में क्या पाया गया?

इस अध्ययन में फिनलैंड और ब्रिटेन के 5,40,000 से अधिक वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) प्रारंभ में मापा गया और फिर उन्हें लगभग 13-14 वर्षों तक फॉलो किया गया। इस दौरान यह देखा गया कि कितने लोगों को संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा या उनकी मृत्यु हुई।


नतीजे चौंकाने वाले थे। मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का खतरा 70 प्रतिशत अधिक पाया गया। अत्यधिक मोटापे वाले व्यक्तियों में यह खतरा तीन गुना तक बढ़ गया।


कौन सी बीमारियों का खतरा बढ़ा?

अध्ययन के अनुसार, मोटापा कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों को गंभीर बना देता है, जिनमें शामिल हैं:


  • फ्लू
  • कोविड-19
  • निमोनिया
  • गैस्ट्रोएंटेराइटिस
  • यूरिन इन्फेक्शन
  • लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन


हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि HIV और टीबी जैसी बीमारियों में मोटापे से गंभीर खतरा बढ़ता हुआ नहीं दिखा।


मोटापा क्या है?

मोटापा एक चिकित्सा स्थिति है, जिसमें शरीर में आवश्यकता से अधिक वसा जमा हो जाता है। इसे आमतौर पर BMI (बॉडी मास इंडेक्स) के माध्यम से मापा जाता है, जो लंबाई और वजन पर आधारित होता है। जिन व्यक्तियों का BMI 30 kg/m² या उससे अधिक होता है, उन्हें मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है।


भारत के लिए अध्ययन का महत्व

NFHS-5 (2019–21) के अनुसार, भारत में लगभग 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे का शिकार हैं। इस प्रकार, यह अध्ययन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।


दिल्ली के फोर्टिस C-DOC अस्पताल के चेयरपर्सन डॉ. अनूप मिश्रा के अनुसार, भारतीयों में कम मोटापे पर ही डायबिटीज और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां शुरू हो जाती हैं, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। जब मोटापा, डायबिटीज, वायु प्रदूषण, भीड़भाड़ और खराब स्वच्छता एक साथ होते हैं, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।


वैश्विक परिप्रेक्ष्य

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) डेटा के आधार पर, शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि 2023 में दुनिया भर में संक्रमण से हुई 54 लाख मौतों में से लगभग 6 लाख मौतें मोटापे से जुड़ी हो सकती हैं। अमेरिका में हर 4 में से 1 संक्रमण की मौत का संबंध मोटापे से है, जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा हर 6 में से 1 है। वियतनाम जैसे देशों में यह आंकड़ा केवल 1 प्रतिशत के आसपास है।


सावधानी बरतने की आवश्यकता

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन ऑब्जर्वेशनल डेटा पर आधारित है। परिणाम यह संकेत देते हैं कि बढ़ता मोटापा भविष्य में संक्रमण से होने वाली मौतों और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को बढ़ा सकता है।


मोटापा अब केवल एक लाइफस्टाइल डिजीज नहीं है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम को कमजोर कर जानलेवा संक्रमणों का रास्ता भी खोल रहा है। भारत जैसे देशों में, जहां संक्रमण का बोझ पहले से अधिक है, मोटापे पर नियंत्रण पाना एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकता बन चुका है।