मेरठ हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एकतरफा प्रेम के चलते हुई हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सागर को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने आरोपी के दुस्साहस पर टिप्पणी की और कहा कि उसने न केवल युवती की हत्या की, बल्कि उसके पिता को भी मार डाला। इस मामले में कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं, लेकिन कोर्ट ने सभी को खारिज कर दिया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालती फैसले के पीछे की कहानी।
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मेरठ हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला gyanhigyan

मेरठ हत्या मामले का अदालती फैसला

मेरठ हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला


उत्तर प्रदेश के मेरठ में एकतरफा प्रेम के चलते एक युवती और उसके पिता की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सागर को किसी भी प्रकार की राहत देने से मना कर दिया। सुनवाई के दौरान, जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आरोपी ने न केवल युवती की हत्या की, बल्कि उसके पिता को भी मार डाला और उसका भाई घायल हो गया।


सागर का दुस्साहस

सुनवाई के दौरान, जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, 'हे भगवान! तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को मार दिया, उसके पिता को भी मार दिया और उसका भाई भी घायल हो गया। तुम तो बड़े दुस्साहसी निकले। क्या तुमने अजय देवगन की बिहार वाली फिल्म नहीं देखी?'


घटना का विवरण

जून 2020 में, युवती के भाई ने मेरठ में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सागर उसकी बहन का पीछा करता था और उससे एकतरफा प्रेम करता था। जब युवती की शादी किसी अन्य युवक से तय हुई, तो आरोपी नाराज हो गया। शादी से दो दिन पहले, सागर अपने कुछ साथियों के साथ युवती के घर पहुंचा और वहां अंधाधुंध फायरिंग की।


इस घटना में युवती और उसके पिता की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए। पुलिस ने सागर को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक राणा ने दलील दी कि घटना के समय सागर की उम्र केवल 18 वर्ष थी और वह तब से जेल में है।


बचाव पक्ष की दलीलें

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मुकदमे के दौरान युवती के भाई ने कहा था कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि वही इस मामले का शिकायतकर्ता है। कथित प्रत्यक्षदर्शी की गवाही साबित नहीं हो सकी है और राज्य सरकार को अभी 43 गवाहों की जांच करनी बाकी है।


आरोपी ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता अपने पहले के बयान से पीछे हट गया है, जिससे एफआईआर की सत्यता पर गंभीर सवाल उठते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ और याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।


यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट सागर की जमानत याचिका खारिज कर चुका है, जबकि इस हमले में शामिल अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।