मेरठ में पुलिस लाठीचार्ज पर मानवाधिकार आयोग का सख्त रुख
मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से किए गए बर्बर लाठीचार्ज के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आई हैं, जिसके बाद आयोग ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि शिकायत में उठाए गए आरोप मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित प्रतीत होते हैं।
शिकायत की पृष्ठभूमि
इस मामले की सुनवाई प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में आयोग के सदस्यों द्वारा की जा रही है। आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत इस शिकायत को स्वीकार किया है। 10 जुलाई को जारी निर्देश में आयोग के रजिस्ट्रार को गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप
यह मामला भोपाल निवासी सुनील अहिरवार द्वारा दर्ज की गई शिकायत से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मेरठ में ललिता गौतम हत्या मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बिना किसी उकसावे के बर्बरता से लाठीचार्ज किया, जिससे कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं।
वीडियो में दिखी बर्बरता
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि घटना से जुड़े एक वायरल वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले से हिरासत में लिए गए असहाय लोगों को बेरहमी से पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो हिरासत में यातना देने का स्पष्ट मामला है। उन्होंने इसे कानून के शासन की विफलता और मानव गरिमा के उल्लंघन का उदाहरण बताया है।
आयोग से हस्तक्षेप की मांग
सुनील अहिरवार ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगाने, स्वतंत्र जांच शुरू करने और वायरल वीडियो की सत्यता की जांच करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने सभी घायलों को चिकित्सा पुनर्वास और कानूनी मुआवजा दिलाने तथा दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
