मेरठ में दलित महिला की हत्या और बेटी का अपहरण: गांव में तनाव और प्रदर्शन
दलित महिला की हत्या से मचा बवाल
मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड गांव में एक दलित महिला की हत्या के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इस हत्या का आरोप गांव के निवासी पारस राजपूत पर लगाया गया है, जिसने कथित तौर पर महिला की हत्या कर उसकी बेटी का अपहरण कर लिया। इस घटना के बाद से गांव में हंगामा जारी है और पुलिस की भारी तैनाती की गई है। मृतक महिला के परिवार और दलित समुदाय के लोग अंतिम संस्कार नहीं कर रहे हैं, उनका कहना है कि पहले पुलिस अपहृत लड़की को बरामद करे। इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है, जहां सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधिकारियों पर चूड़ियां फेंकी हैं।
माना जा रहा है कि जब लड़की का अपहरण किया गया, तब उसकी मां सुनीता ने इसका विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप पारस ने गंडासे से सुनीता पर हमला किया। इस हमले में सुनीता गंभीर रूप से घायल हो गई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पारस के परिवार का कहना है कि वह नाबालिग है और दोनों के बीच प्रेम संबंध थे।
DM-SSP की मौजूदगी में स्थिति की निगरानी
गुरुवार की घटना के संदर्भ में पारस के परिवार का कहना है कि लड़की ने उसे बुलाया था और जब वह वहां पहुंचा, तो उसकी मां ने विरोध किया। पारस के परिवार का दावा है कि लड़की ने खुद ही यह सब रचा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और गांव में DM-SSP सहित कई थानों की फोर्स तैनात है।
SSP डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि लड़की की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी हमारी प्राथमिकता है। पुलिस ने 10 टीमों को इस मामले में लगाया है और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।
दलित समाज का प्रदर्शन
मृतक सुनीता के शव को लेकर दलित समाज के लोग गांव में प्रदर्शन कर रहे हैं। परिवार ने अंतिम संस्कार की शर्त रखी है कि जब तक उनकी बेटी को पुलिस नहीं लाएगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। सुनीता के पति सतेंद्र ने बताया कि वह खेत में थे जब यह घटना हुई।
SP देहात का प्रयास
पीड़ित सतेंद्र ने कहा कि अंतिम संस्कार तब तक नहीं होगा जब तक उनकी बेटी को बरामद नहीं किया जाता। SP देहात अभिजीत कुमार स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। एंबुलेंस में आक्रोशित दलित समाज के लोगों ने तोड़फोड़ की और शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
राजनीतिक हलचल
इस हत्या और अपहरण के मामले ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने मृतक के घर जाकर पुलिस अधिकारियों पर चूड़ियां फेंकी। सरधना विधायक अतुल प्रधान को भी गांव में प्रवेश नहीं करने दिया गया। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने वीडियो कॉल पर पीड़ित परिवार से बात की और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
