मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत के प्रचार की आवश्यकता पर जोर दिया
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने हाल ही में संस्कृत को भारत की आधिकारिक भाषा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब 'विश्वगुरु' नहीं है और इस शब्द का उपयोग नहीं होना चाहिए। जोशी ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार और आधुनिक विज्ञान में इसके उपयोग की बात की। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी संस्कृत के महत्व को रेखांकित किया। जानें इस विषय पर उनके विचार और संस्कृत के भविष्य के बारे में क्या कहा गया।
| Apr 20, 2026, 20:15 IST
संस्कृत को भारत की आधिकारिक भाषा बनाने की अपील
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि भारत अब 'विश्वगुरु' की स्थिति में नहीं है और इस शब्द का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत के प्रचार-प्रसार और क्वांटम कंप्यूटिंग में इसके उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। जोशी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के दौरान पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने संस्कृत को भारत की आधिकारिक भाषा बनाने की जोरदार वकालत की। जोशी ने कहा कि बी आर अंबेडकर जैसे कई लोगों ने अतीत में इसके लिए प्रयास किए, लेकिन उनके प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया गया।
जोशी ने कहा कि उनके अनुसार, हमें वर्तमान में 'विश्वगुरु' होने की धारणा का उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस दिशा में प्रयास करना चाहिए, लेकिन वर्तमान में हम इस स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने संस्कृत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक कार्यों में इस प्राचीन भाषा का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है।
जोशी ने आगे कहा कि यदि देश में अधिकतर कार्य संस्कृत में होने लगे, तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने बताया कि संविधान बनाते समय डॉ. अंबेडकर ने भी संस्कृत को राष्ट्रीय भाषा बनाने का प्रयास किया था। संस्कृत न केवल भारत की, बल्कि विश्व की भी एक महत्वपूर्ण विरासत है। इस बीच, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी संस्कृत के प्रचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसका प्रचलन अन्य भारतीय भाषाओं को समृद्ध करेगा और लोगों को भारत की प्राचीन संस्कृति से जोड़ेगा।
भागवत ने कहा कि भारत को जीवंत रखने के लिए संस्कृत को समझना आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत भारती कार्यक्रम में कहा कि भारत अनेक भाषाओं का घर है और हर भाषा अपनी जगह पर एक राष्ट्रीय भाषा है। लेकिन इन भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी संस्कृत है।
पहले हम विश्वगुरु थे, अब झालमुरी है 🤡
— Srinivas BV (@srinivasiyc) April 20, 2026
नही यकीन है तो भाजपा के कद्दावर नेता, मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मुरली मनोहर जोशी जी को सुन लीजिए। pic.twitter.com/eaCqSTqy41
