मुजफ्फरनगर में सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत

मुजफ्फरनगर में एक सड़क दुर्घटना में महिपाल कश्यप और उनके परिवार के चार सदस्यों की जान चली गई। हादसे के बाद ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर धरना दिया। प्रशासन ने आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया है। इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डाल दिया है, खासकर 12 वर्षीय शिवम के लिए, जो इस हादसे में अकेला बचा है।
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हादसे का विवरण

मुजफ्फरनगर के हैदरनगर जलालपुर में एक दुखद सड़क दुर्घटना में महिपाल कश्यप, उनकी पत्नी पूनम, बेटी राधिका और बेटे अभि की जान चली गई। यह घटना तब हुई जब वे बघरा की ओर बाइक से जा रहे थे और कल्याणकारी कन्या इंटर कॉलेज की बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।


घायलों की स्थिति

इस हादसे में पूनम गंभीर रूप से घायल हो गईं और उपचार के दौरान उनकी भी मृत्यु हो गई। इस प्रकार, एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई।


ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

महिपाल कश्यप, उनके बेटे अभि और बेटी राधिका के शवों को पोस्टमार्टम के बाद जागाहेड़ी टोल प्लाजा पर रखकर ग्रामीणों ने 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। उन्होंने तीन घंटे तक जाम लगाकर धरना दिया। एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने आर्थिक सहायता का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया।


पंचायत की बैठक

गुरुद्वारे में हुई पंचायत में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रविंद्र मनी और अन्य नेताओं ने परिवार के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। इसके बाद ग्रामीण और जनप्रतिनिधि टोल पर पहुंचे और शवों के साथ जाम लगा दिया।


प्रशासन की मदद

एडीएम गजेंद्र कुमार, एसडीएम प्रवीण द्विवेदी और अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मदद का आश्वासन दिया। स्कूल प्रबंधन ने चार लाख रुपये और राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने एक लाख रुपये की सहायता दी। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि मृतक परिवार के बेटे शिवम की शिक्षा का खर्च उठाया जाएगा।


टोल पर जाम

धरने के दौरान टोल प्लाजा बंद रहा, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कुछ वाहन चालकों ने गांवों से वाहन निकाले, जिससे वहां भी जाम लग गया।


हादसे का कारण

महिपाल कश्यप (45) अपनी पत्नी पूनम (44), बेटी राधिका (10) और बेटे अभि (8) के साथ बुधवार को बाइक पर सवार होकर बघरा में दुर्गा मंदिर में प्रसाद चढ़ाने जा रहे थे। तभी सामने से आई बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।


परिवार का दुख

इस हादसे में केवल 12 वर्षीय शिवम ही जीवित बचा है, जिसने अपने परिवार के सदस्यों को मुखाग्नि दी।