मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदाय को पेसा अधिनियम का लाभ उठाने की सलाह दी

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदाय से पेसा अधिनियम का अध्ययन करने और उसके प्रावधानों को समझने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से ग्राम सभाओं और पंचायतों को मजबूत किया जाएगा, जिससे आदिवासी अपनी जल, जंगल और जमीन की रक्षा कर सकेंगे। सोरेन ने बाहरी नियंत्रण के खतरे और भूमि हड़पने की समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा, उन्होंने सौर पैनल लगाने का सुझाव दिया, जिससे आदिवासी आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदाय को पेसा अधिनियम का लाभ उठाने की सलाह दी

पेसा अधिनियम का महत्व

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को आदिवासी समुदाय से आग्रह किया कि वे पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) का गहन अध्ययन करें और इसके प्रावधानों को समझें।


आदिवासियों को श्रद्धांजलि

सोरेन ने 1948 में झारखंड राज्य के गठन के लिए शहीद हुए आदिवासियों को श्रद्धांजलि देते हुए एक सभा में कहा कि आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए पहले से ही छोटानागपुर और संथाल परगना किरायेदारी अधिनियम मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पेसा अधिनियम के कार्यान्वयन से ग्राम सभा और पंचायतों को मजबूती मिलेगी।


बाहरी नियंत्रण का खतरा

एक आधिकारिक बयान में सोरेन ने बताया कि इस कानून की जानकारी की कमी के कारण बाहरी लोग शहरीकरण का लाभ उठाकर नियंत्रण स्थापित कर रहे हैं।


भूमि हड़पने की समस्या

सोरेन ने कहा कि कई ग्राम प्रधानों (मानकी-मुंडा) के पास सैकड़ों एकड़ भूमि है, लेकिन सीएनटी और एसपीटी अधिनियम के बावजूद दलाल जमीन हड़पने में लगे हुए हैं।


सौर पैनल का सुझाव

मुख्यमंत्री ने आदिवासियों से कहा कि यदि उनकी भूमि का उपयोग कृषि के लिए नहीं किया जा रहा है, तो वे उस पर सौर पैनल स्थापित करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उनकी द्वारा उत्पादित बिजली खरीदने के लिए तैयार है। इस दृष्टिकोण से उन्हें आर्थिक लाभ होगा।


पेसा अधिनियम के लाभ

सोरेन ने कहा कि पेसा अधिनियम के कार्यान्वयन से ग्रामीणों को ग्राम सभाओं और पंचायतों के माध्यम से उनके अधिकार मिलेंगे, जिससे वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा कर सकेंगे।