मुख्यमंत्री ने मतदाता सूचियों के संशोधन पर उठाए गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री का तीखा बयान
शनिवार को पश्चिमी राज्य के मुख्यमंत्री ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत जो गतिविधियाँ चल रही हैं, वे आम नागरिकों की गरिमा, आजीविका और संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसे डराने-धमकाने और बहिष्कार का एक साधन करार दिया।
अमर्त्य सेन का मामला
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को एसआईआर नोटिस मिलने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे संस्थागत अहंकार का असली चेहरा सामने आया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि सेन जैसी प्रमुख हस्तियों को नहीं बख्शा जा रहा है, तो आम जनता, जैसे गरीब, प्रवासी मजदूर और महिलाएं, किन समस्याओं का सामना कर रही होंगी।
सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुनवाईयां यांत्रिक तरीके से, बिना सहानुभूति और मानवीय संवेदनाओं के बिना की जा रही हैं। इसके परिणाम विनाशकारी रहे हैं, जिसमें 77 मौतें, आत्महत्या के प्रयास और अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएँ शामिल हैं। ये सभी एक अनियोजित और जबरदस्ती की प्रक्रिया से उत्पन्न भय और चिंता से जुड़े हैं।
भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका
भारत निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा कि यह सर्वोच्च चुनाव निकाय अपने संवैधानिक दायित्वों से भटक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र भय के आधार पर नहीं टिकता और मतदाता सूचियों को जबरदस्ती से शुद्ध नहीं किया जा सकता।
लोकतंत्र की पवित्रता की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की 'पवित्रता' को बहाल करने की उम्मीद जताते हुए कहा कि संवैधानिक अधिकारियों को तानाशाहों की तरह व्यवहार करके सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने इन चिंताओं को औपचारिक रूप से मुख्य चुनाव आयोग के समक्ष रखा है और सुधार की उम्मीद जताई है।
