मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का स्पष्टीकरण: युवाओं की आलोचना नहीं की

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने विवादास्पद "तिलचट्टे" बयान पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया और यह आरोप लगाया कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना उन लोगों के लिए थी जिन्होंने फर्जी डिग्रियों के माध्यम से वकालत में प्रवेश किया है। उन्होंने युवाओं पर गर्व व्यक्त किया और उन्हें विकसित भारत का स्तंभ माना। यह विवाद एक वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित करने से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान उत्पन्न हुआ।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का स्पष्टीकरण: युवाओं की आलोचना नहीं की gyanhigyan

मुख्य न्यायाधीश का स्पष्टीकरण

भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को अपने विवादास्पद "तिलचट्टे" बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को देश के युवाओं की आलोचना के रूप में प्रस्तुत करना गलत है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि उनके मौखिक बयान को एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान गलत तरीके से उद्धृत किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना उन लोगों के लिए थी, जिन्होंने फर्जी डिग्रियों के माध्यम से वकालत में प्रवेश किया है। ऐसे लोग अन्य क्षेत्रों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, इसलिए उन्हें परजीवी के रूप में देखा जाना चाहिए। यह कहना गलत है कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की है।


युवाओं पर गर्व

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है और वे उन्हें विकसित भारत का आधार मानते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे न केवल हमारे वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधनों पर गर्व है, बल्कि हर युवा मुझे प्रेरित करता है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय युवाओं के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान है और वे उन्हें एक विकसित भारत का स्तंभ मानते हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्य न्यायाधीश ने एक वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित करने से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।


सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान, पीठ ने याचिकाकर्ता वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता बनने के लिए आक्रामक प्रयास करने पर फटकार लगाई और उनके आचरण पर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि दिल्ली उच्च न्यायालय याचिकाकर्ता को वरिष्ठ अधिवक्ता का पदनाम देता है, तो सर्वोच्च न्यायालय इसे उनके पेशेवर आचरण के आधार पर रद्द कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और क्या आप उनके साथ मिलकर काम करना चाहते हैं?