मुंबई में पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी: नाबालिग के साथ छेड़छाड़ का मामला

मुंबई के वर्ली में एक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को 9 साल की बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस घटना ने पुलिस विभाग की विश्वसनीयता को हिला दिया है। आरोपी जितेंद्र नवनीत पर आरोप है कि उसने बच्ची के सामने अश्लील हरकतें कीं। इसके अलावा, एक अन्य नाबालिग लड़के ने भी आरोपी के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन CCTV कैमरों की कमी ने जांच को चुनौती दी है। जानें इस मामले के सभी पहलुओं के बारे में।
 | 
मुंबई में पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी: नाबालिग के साथ छेड़छाड़ का मामला gyanhigyan

मुंबई में गंभीर घटना

मुंबई में पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी: नाबालिग के साथ छेड़छाड़ का मामला


मुंबई के वर्ली क्षेत्र में एक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP) को 9 वर्षीय बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करने और छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस घटना ने पुलिस विभाग की छवि को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।


आरोपी की पहचान

आरोपी का नाम जितेंद्र दादाराव नवनीत (56) है, जिसे वर्ली पुलिस ने 24 अप्रैल को हिरासत में लिया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वर्ली पुलिस ने इस मामले में POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है और जांच जारी है।


घटना का विवरण

FIR के अनुसार, यह घटना 23 अप्रैल की शाम को हुई। बच्ची वर्ली के सिंह गार्डन में खेल रही थी, तभी आरोपी वहां पहुंचा और अश्लील हरकतें कीं। बच्ची ने डर के मारे घर जाकर अपनी मां को बताया, जिन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।


जितेंद्र नवनीत का बैकग्राउंड

जितेंद्र नवनीत मूल रूप से नागपुर का निवासी है और नवंबर 2025 तक मुंबई में पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में तैनात था। वह वर्ली पुलिस कैंप में अकेला रहता था। इस मामले ने पुलिस विभाग के भीतर अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।


एक और नाबालिग का खुलासा

जांच में एक नया मोड़ तब आया जब एक अन्य नाबालिग लड़के ने भी आरोपी के खिलाफ शिकायत की। उसने बताया कि आरोपी ने उसके साथ भी इसी तरह की अनुचित हरकतें की थीं। पुलिस ने इस दावे की जांच शुरू कर दी है।


CCTV कैमरों की कमी

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोप गंभीर हैं और गिरफ्तारी के लिए त्वरित कार्रवाई की गई। हालांकि, सिंह गार्डन में CCTV कैमरे न होने के कारण पुलिस को कोई दृश्य प्रमाण नहीं मिला है। पुलिस अब बच्चों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।