मुंबई उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला: समानता का दावा और भरण-पोषण राशि में कटौती
अदालत का निर्णय
मुंबई, 28 जुलाई: मुंबई उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा है कि समानता का दावा केवल चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता। यदि पति और पत्नी दोनों काम कर रहे हैं, तो उन्हें घर के खर्च और बच्चों की शिक्षा का बोझ साझा करना चाहिए। यह टिप्पणी अदालत ने एक अलग रह रही पत्नी और उनके नाबालिग बेटे के लिए मासिक भरण-पोषण राशि को कम करते हुए की। न्यायमूर्ति एम. एम. साथये की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह पारिवारिक अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति को पत्नी और बेटे के लिए प्रति माह 50,000 रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।
भरण-पोषण राशि में कमी
उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण राशि को घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया। अदालत ने कहा कि पति मुंबई के अंधेरी में उस मकान की ईएमआई चुका रहा है, जिसमें पत्नी और बेटा रह रहे हैं, साथ ही नवी मुंबई के पनवेल में स्थित दूसरे मकान की ईएमआई भी वही भर रहा है। जबकि वह स्वयं बिहार में निवास कर रहा है।
पत्नी का योगदान
अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी इन दोनों मकानों की ईएमआई में कोई योगदान नहीं कर रही है। पति ने याचिका में मासिक भरण-पोषण राशि को 50,000 रुपये से घटाकर 25,000 रुपये करने का अनुरोध किया था। उसने पत्नी से बिहार में उसके साथ रहने या कम से कम पनवेल स्थित मकान में रहने का आग्रह किया, ताकि वह अंधेरी वाले मकान को बेचकर अपने आर्थिक बोझ को कम कर सके, लेकिन पत्नी ने इससे इनकार कर दिया।
समानता का दावा
उच्च न्यायालय ने कहा कि पति की मांग में कोई अनुचितता नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी बिना ईएमआई चुकाए अंधेरी जैसे महंगे इलाके में रहने की इच्छा रखती है, तो पति द्वारा भरण-पोषण राशि कम करने की मांग करना गलत नहीं है। पीठ ने कहा कि समानता का दावा केवल एकतरफा नहीं किया जा सकता, खासकर जब दोनों पक्ष कमाने वाले हों।
कोविड-19 का प्रभाव
अदालत ने यह भी कहा कि यदि पति और पत्नी दोनों काम कर रहे हैं और चाहते हैं कि उनके बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, तो उसकी पढ़ाई का खर्च भी दोनों को मिलकर उठाना चाहिए। पति ने अदालत को बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उसकी नौकरी चली गई थी और अब वह पहले की तुलना में कम वेतन वाली नौकरी कर रहा है, जिससे वह आर्थिक दबाव में है। अदालत ने माना कि कोविड-19 का प्रभाव कई लोगों के रोजगार और कारोबार पर पड़ा था, इसलिए पति की आय में कमी का कारण उचित है।
