माकपा ने एथनॉल मिश्रण नीति पर उठाए गंभीर सवाल

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र सरकार की एथनॉल मिश्रण नीति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पार्टी का कहना है कि यह नीति उपभोक्ताओं, खाद्य सुरक्षा, किसानों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। माकपा ने वाहन चालकों को विकल्प देने की मांग की है और एथनॉल मिश्रण की मात्रा को 20 प्रतिशत से अधिक न बढ़ाने का आग्रह किया है। जानें इस मुद्दे पर माकपा के ताजा बयान में क्या कहा गया है।
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माकपा की चिंता

नई दिल्ली, 7 अगस्त: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की एथनॉल मिश्रण नीति को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी का कहना है कि यह नीति उपभोक्ताओं, खाद्य सुरक्षा, किसानों के हितों और पर्यावरणीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। माकपा के पोलित ब्यूरो ने एक बयान में सुझाव दिया कि वाहन चालकों को एथनॉल-मिश्रित और बिना मिश्रण वाले पेट्रोल में से किसी एक का चयन करने का विकल्प दिया जाना चाहिए।


पोलित ब्यूरो ने 'सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चर्स' (सियाम) द्वारा केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजे गए पत्र का उल्लेख किया, जिसमें एथनॉल-मिश्रित ईंधन (ई20) के संभावित नुकसान के बारे में चिंता जताई गई थी।


पार्टी ने आरोप लगाया कि यह पत्र बाद में दबाव के कारण वापस ले लिया गया, लेकिन इसमें उठाए गए मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण हैं। माकपा ने कहा कि जब एथनॉल मिश्रण नीति लागू की गई थी, तब उपभोक्ताओं को यह आश्वासन दिया गया था कि एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में सस्ता होगा। हालांकि, पार्टी का दावा है कि ई20 लगभग समान कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि यह वाहन को कम माइलेज देता है और इंजन में अधिक घिसावट का कारण बनता है।


बयान में कहा गया है कि उपभोक्ताओं के पास मिश्रित ईंधन का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, जबकि वाहन के प्रदर्शन और रखरखाव को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। माकपा ने यह भी मांग की है कि एथनॉल मिश्रण की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।