माँ ने बेटे की जान बचाने के लिए लिवर का हिस्सा दान किया

एक माँ ने अपने 17 वर्षीय बेटे अरमान की जान बचाने के लिए अपने लिवर का हिस्सा दान किया। यह प्रेरणादायक कहानी एक माँ के अदम्य साहस और प्यार को दर्शाती है। जब अरमान की जिंदगी खतरे में थी, रेनू ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने बेटे को नया जीवन देने का निर्णय लिया। जानिए कैसे इस सफल ट्रांसप्लांट ने दोनों को एक नया जीवन दिया।
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एक माँ का साहसिक कदम

माँ ने बेटे की जान बचाने के लिए लिवर का हिस्सा दान किया


नवी मुंबई के अपोलो अस्पताल में एक माँ ने अपने 17 वर्षीय बेटे अरमान की जान बचाने के लिए अपने लिवर का हिस्सा दान किया। यह एक ऐसा निर्णय था जिसने न केवल बेटे की जिंदगी को बचाया, बल्कि माँ और बेटे दोनों को एक नया जीवन भी दिया।


37 वर्षीय रेनू खन्ना ने अपने बेटे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत निर्णय लिया। अरमान एक्यूट लिवर फेलियर से जूझ रहा था, और डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि उसके पास केवल एक या दो दिन बचे हैं।


जब अरमान की हालत बिगड़ रही थी, रेनू अस्पताल में उसके पास बैठी थीं। भारत में अंगदान की कमी के कारण, जीवित डोनर की आवश्यकता थी। अरमान का लिवर लगभग काम करना बंद कर चुका था, जिससे उसके शरीर में जहरीले पदार्थ जमा हो रहे थे।


रेनू ने तुरंत जांच के लिए आगे बढ़ने का निर्णय लिया। 24 घंटों के भीतर, डॉक्टरों ने उन्हें डोनेशन के लिए फिट घोषित किया। डॉ. गुरुप्रसाद शेट्टी की टीम ने तेजी से ट्रांसप्लांट प्रक्रिया शुरू की।


सर्जरी सफल रही, और माँ का लिवर बेटे के शरीर में लगाकर उसे नया जीवन दिया गया। रेनू ने कहा, "जब मेरे बेटे की जान बचाने की बात आई, तो मैंने एक पल भी नहीं सोचा।"


आज, अरमान धीरे-धीरे अपनी सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहा है, जबकि रेनू भी ठीक हो रही हैं। यह कहानी एक माँ के अदम्य साहस और प्यार की मिसाल है।