महोबा में रिटायरमेंट का अनोखा जश्न: 35 साल की सेवा के बाद दूल्हे की तरह विदाई

उत्तर प्रदेश के महोबा में एक वरिष्ठ लिपिक की विदाई को दूल्हे की तरह मनाया गया। 35 वर्षों की सेवा के बाद, रघुवीर सिंह तोमर को फूलों से सजी घोड़ी पर बैठाया गया और उनके सम्मान में ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया। इस अनोखे विदाई समारोह ने सभी का दिल जीत लिया। जानें इस खास मौके के बारे में और कैसे उनके सहकर्मियों ने इसे यादगार बनाया।
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महोबा में रिटायरमेंट का अनोखा जश्न: 35 साल की सेवा के बाद दूल्हे की तरह विदाई

महोबा में विदाई का अनोखा दृश्य

महोबा में रिटायरमेंट का अनोखा जश्न: 35 साल की सेवा के बाद दूल्हे की तरह विदाई


उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से एक दिल छू लेने वाली विदाई की तस्वीर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर सभी का ध्यान आकर्षित किया है। आमतौर पर रिटायरमेंट के समय भावुकता का माहौल होता है, लेकिन महोबा के बेसिक शिक्षा विभाग में यह दृश्य एकदम अलग था। यहाँ एक वरिष्ठ लिपिक की विदाई एक भव्य शादी के समारोह की तरह मनाई गई।


35 वर्षों का सफर और दूल्हे जैसी विदाई

बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत वरिष्ठ लिपिक रघुवीर सिंह तोमर ने अपने करियर के 35 साल इस विभाग को समर्पित किए। जब उनका रिटायरमेंट का दिन आया, तो उनके सहकर्मियों ने इसे खास बनाने के लिए एक अनोखी योजना बनाई। रघुवीर सिंह को फूलों से सजी घोड़ी पर बैठाया गया, जैसे कोई दूल्हा अपनी बारात में निकलता है।


डीजे की धुन और रंगों की होली

इस विदाई जुलूस ने महोबा की सड़कों पर धूम मचा दी। ढोल-नगाड़ों की थाप और डीजे की धुन पर साथी कर्मचारी नाचने लगे। पूरे रास्ते अबीर और गुलाल उड़ाया गया, जिससे ऐसा लगा जैसे होली का त्योहार समय से पहले आ गया हो। घोड़ी पर सवार होकर रघुवीर सिंह ने अपने करियर की एक नई शुरुआत की।


भावुक रघुवीर सिंह का अनुभव

इस सम्मान से अभिभूत रघुवीर सिंह तोमर ने कहा कि आज उन्हें अपनी शादी का दिन याद आ गया जब वह दुल्हन लेने घोड़ी पर चढ़े थे। उन्होंने अपने साथियों के प्यार और सम्मान को अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।


BSA की सराहना

बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल मिश्रा ने रघुवीर सिंह के कार्यकाल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के तीन महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं—शिक्षा, विवाह और रिटायरमेंट। विभाग ने उनके इस अंतिम पड़ाव को उत्सव में बदल दिया क्योंकि वह विभाग की रीढ़ थे।


रॉयल कार से विदाई

यह जश्न केवल घोड़ी तक सीमित नहीं रहा। घोड़ी पर नाच-गाने के बाद, रघुवीर सिंह को एक सजी हुई रॉयल कार में बैठाया गया और पूरा स्टाफ उन्हें उनके घर तक छोड़ने गया।